पतंजलि योगपीठ ने हिमाचल सरकार के खिलाफ वापस लिया केस
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पतंजलि योगपीठ ने सोलन के साधुपुल में पिछली भाजपा सरकार की ओर से दी गई 21 एकड़ भूमि की लीज को रद्द करने के मौजूदा सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है।
पतंजलि योगपीठ ने एक आवेदन दायर कर याचिका को वापस लेने की इजाजत मांगी थी। इसे न्यायाधीश सीबी बारोवालिया ने बिना शर्त स्वीकार कर याचिका का निपटारा कर दिया। साल 2010 में भाजपा सरकार ने योगपीठ को कंडाघाट के साधुपुल में 21 एकड़ भूमि लीज पर दी थी।
पंतजलि योगपीठ ने इस भूमि पर फल विधायन संयंत्र, आयुर्वेद दवाएं बनाने और क्षेत्र में हर्बल गार्डन विकसित करने का कार्य भी शुरू कर दिया था। योगपीठ के अनुसार उन्होंने साधुपुल में इस जगह को विकसित करने पर करीब 19 करोड़ की राशि व्यय की थी।
धूमल सरकार ने लीज पर दी थी जमीन, कांग्रेस ने किया था रद्द
पिछली सरकार ने इस जमीन को 99 साल के लिए 17 लाख रुपये में लीज पर दिया था। पतंजलि योगपीठ की तरफ से आचार्य बालकृष्ण ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। साल 2012 में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने इस लीज को रद्द कर दिया था।
इसके बाद पतंजलि योगपीठ ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसमें लीज कानूनों की अनदेखी कर कैबिनेट की ओर से जबरन लीज रद्द करने का आरोप लगाया था।
हाईकोर्ट ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद उस स्थान पर फरवरी 2013 में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। हाल ही में मंत्रिमंडल ने इस भूमि को दोबारा से पतंजलि योगपीठ को देने के सशर्त फैसले को देखते हुए योगपीठ ने याचिका वापस ले ली है।