पतंजलि इस औषधीय पौधे से तैयार करेगा उत्पाद, डायबिटीज का नहीं रहेगा नामोनिशान
प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में पाए जाने वाले सीबकथोर्न (छरमा) की औषधीय खूबियों को मद्देनजर रखते हुए पतंजलि अपने उत्पाद तैयार करने जा रही है। पतंजलि इस औषधीय पौधे की पत्तियों और फलों को खरीदना चाहती है। इसके लिए पतंजलि ने बाकायदा लाहौल की छरमा सोसायटी को छरमा पत्तियों और फलों की डिमांड भी दी है।
पतंजलि लाहौल स्पीति और लद्दाख से 3000 टन छरमा की पत्तियां और 1000 टन फल खरीदना चाहती है। लाहौल के कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी में वैज्ञानिकों ने रूस से लाई गई छरमा की पांच से अधिक प्रजातियों को विकसित किया है। इन प्रजातियों के पौधों को किसानों को बांटा गया है। लाहौल घाटी में 40 से 50 टन तक छरमा के उत्पादन की क्षमता है।
लाहौल में पाए जाने वाली छरमा की पत्तियों को चाय बनाने में इस्तेमाल किया है। छरमा की पत्तियों से बनी चाय सेहत के लिए बेहद गुणकारी मानी जाती है। उधर, लाहौल छरमा सोसायटी के अध्यक्ष विशन दास परशीरा ने कहा कि पतंजलि ने लाहौल में छरमा खरीदने की बात की है। लेकिन, पतंजलि ने अधिक मांग की है। उसके हिसाब से अभी तक लाहौल में छरमा का उत्पादन नहीं हो रहा है। इतनी अधिक डिमांड पूरी कर पाना मुश्किल है।
इसके लिए अभी समय लगेगा। हालांकि चंडीगढ़ एग्रीटेक कंपनी की यूनिट बद्दी से एक साल का करार हुआ है। चंडीगढ़ एग्रीटेक कंपनी को छरमा सोसायटी छरमा की पत्तियां और फल देगी। कंपनी बद्दी में चायपत्ती, दवाइयां और अन्य उत्पाद तैयार कर रही है। छरमा से चाय के अलावा दवाइयां और ब्यूटी उत्पाद भी बनाए जाते हैं।
डायबिटीज के लिए रामबाण है छरमा
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के छरमा वैज्ञानिक डॉ. विरेंद्र सिंह का कहना है कि छरमा की पत्तियों का इस्तेमाल चाय की पत्तियों में होता है। डायबिटीज-2 को ठीक करने में छरमा की पत्तियां रामबाण होती हैं। इस बात का खुलासा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोध से हुआ है। छरमा एक बेहद गुणकारी औषधीय पौधा है। चीन में लोग पांच पत्ती छरमा की दो मिनट तक उबालकर उसे छान कर पीते हैं।
360 रुपये किलो बिक रही छरमा की पत्तियां
लाहौल में इस बार किसानों को छरमा की पत्तियों के अच्छे दाम मिल रहे हैं। छरमा की पत्तियां 360 रुपये किलो के हिसाब से किसानों से खरीदी जा रही है। जो पिछले साल से करीब 100 रुपये कम है। लाहौल में इन दिनों छरमा की पत्तियों को निकालने का काम भी आरंभ हो चुका है। इन पत्तियों को पीला पड़ने से पहले ही निकालना होता है।