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नहीं मिला न्याय, महामहिम से मांगी इच्छा मृत्यु

Wed, 29 Oct 2014 09:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सिरमौर
अमर उजाला ब्यूरो/ सिरमौर Updated Wed, 29 Oct 2014 09:39 AM IST
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pat association general secretary Death Wish to president of india

प्रदेश भर में कार्यरत तीन हजार पांच सौ प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पैट) को न्याय न मिलने से निराश होकर संघ के महासचिव आत्माराम ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करने की मांग की है।

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उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मानव संसाधन मंत्री और सुप्रीम कोर्ट को 4 पेज का पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। लिखा है कि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्मदाह कर लेंगे। उनकी मौत के जिम्मेवार इस दशा में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग हिप्र. और राज्य सरकार होगी। उनकी मौत के बाद उनके परिवार का पालन पोषण भी सरकार करेगी।
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उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश के 3400 पैट शिक्षकों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। वर्ष 2002 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने 1329 ग्रामीण विधा उपासकों की भर्ती की थी। 2003 में सता परिवर्तन होने के बाद उसी तर्ज पर कांग्रेस सरकार ने 2003 से लेकर 2007 तक 3400 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की भर्ती की।
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2008 में भाजपा सरकार के दोबारा काबिज होते ही सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए ग्रामीण विद्या उपासकों को पैट से अलग करके उन्हें जेबीटी का विशेष प्रशिक्षण दिलाकर सेवाएं नियमित कर दीं। 2011 से पैट शिक्षकों से भी जेबीटी का प्रशिक्षण करवाया गया। लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद परीक्षा नहीं करवाई।

खतरे में हजारों शिक्षकों का भविष्‍य

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सरकार ने इस प्रशिक्षण पर चार करोड़ 46 लाख रुपये खर्च किए थे। पैट शिक्षकों पर आरटीआई के नियम को लागू करना गलत है। आरटीआई नियम 2010 में लागू किया है जबकि प्रदेश में पैट की नियुक्तियां 2003 से 2007 तक की गई हैं।

आरोप लगाया कि सरकार के अड़ियल रवैये के चलते साढे़ तीन हजार पैट शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। पैट शिक्षकों के हक की लड़ाई वह कई सालों से लड़ रहे हैं। इसके लिए वह अदालत तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन उन्हें चारों और से निराश ही हाथ लगी है।

इससे आहत होकर अब उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की मांग की है।

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