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Shimla News: बिना रूट के निगम की बसों में बैठाई जा रहीं हैं सवारियां
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प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन ने सीएम को सौंपा ज्ञापन
40 किमी दूरी से आने वाली बसों को न दें शहर में प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में एचआरटीसी की ओर से बिना रूट परमिट और समयसारिणी के बसों में सवारियों को बैठाने पर विवाद गरमा गया है। इसे लेकर बुधवार को 3:30 बजे शिमला सिटी प्राइवेट बस ऑपरेटर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सचिवालय में मुलाकात कर यह मामला उठाया।
यूनियन अध्यक्ष रोशन लाल और महासचिव सुनील चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा। इसमें 2011 में जारी अधिसूचना को सख्ती से लागू करने और 40 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली बसों को शहर में प्रवेश न देने की मांग उठाई है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इसे लागू करवाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। इससे शहर में यातायात जाम लग रहा है। इसके साथ ही प्राइवेट बस ऑपरेटरों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके चलते टैक्स, बैंक की किस्तेें और कर्मचारियों की सैलरी तक निकालना मुश्किल हो गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि पहले इस विषय को उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के समक्ष रखा जाए। यदि वहां से समाधान नहीं निकलता है तो वह स्वयं हस्तक्षेप कर इस समस्या का हल निकालेंगे। ऑपरेटरों ने कहा कि इस समस्या का यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो 13 अक्तूबर से ड्राइवर-कंडक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके बाद भी यदि प्रशासन नहीं जागा तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। यूनियन ने इस दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप और आरटीओ अनिल कुमार शर्मा को भी पत्र भेजा।
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यह भी गंभीर समस्या
प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन का कहना है कि एचआरटीसी नियमों को ताक पर रखकर एमवी एक्ट (मोटर व्हीकल एक्ट) की धज्जियां उड़ा रहा है। यूनियन के मुताबिक स्कूल बसों में आम सवारियों को बैठाया जा रहा है। मरम्मत के लिए वर्कशॉप जाने वाली बसें भी वापसी पर सवारियां लेकर आ रही हैं। डीजल भरवाने और चार्जिंग के बहाने आने-जाने वाली बसें भी रूट परमिट तथा टाइमटेबल के बिना शहर में सवारियां बैठा रही हैं।
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40 किमी दूरी से आने वाली बसों को न दें शहर में प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में एचआरटीसी की ओर से बिना रूट परमिट और समयसारिणी के बसों में सवारियों को बैठाने पर विवाद गरमा गया है। इसे लेकर बुधवार को 3:30 बजे शिमला सिटी प्राइवेट बस ऑपरेटर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सचिवालय में मुलाकात कर यह मामला उठाया।
यूनियन अध्यक्ष रोशन लाल और महासचिव सुनील चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा। इसमें 2011 में जारी अधिसूचना को सख्ती से लागू करने और 40 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली बसों को शहर में प्रवेश न देने की मांग उठाई है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इसे लागू करवाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। इससे शहर में यातायात जाम लग रहा है। इसके साथ ही प्राइवेट बस ऑपरेटरों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके चलते टैक्स, बैंक की किस्तेें और कर्मचारियों की सैलरी तक निकालना मुश्किल हो गया है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि पहले इस विषय को उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के समक्ष रखा जाए। यदि वहां से समाधान नहीं निकलता है तो वह स्वयं हस्तक्षेप कर इस समस्या का हल निकालेंगे। ऑपरेटरों ने कहा कि इस समस्या का यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो 13 अक्तूबर से ड्राइवर-कंडक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके बाद भी यदि प्रशासन नहीं जागा तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। यूनियन ने इस दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप और आरटीओ अनिल कुमार शर्मा को भी पत्र भेजा।
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यह भी गंभीर समस्या
प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन का कहना है कि एचआरटीसी नियमों को ताक पर रखकर एमवी एक्ट (मोटर व्हीकल एक्ट) की धज्जियां उड़ा रहा है। यूनियन के मुताबिक स्कूल बसों में आम सवारियों को बैठाया जा रहा है। मरम्मत के लिए वर्कशॉप जाने वाली बसें भी वापसी पर सवारियां लेकर आ रही हैं। डीजल भरवाने और चार्जिंग के बहाने आने-जाने वाली बसें भी रूट परमिट तथा टाइमटेबल के बिना शहर में सवारियां बैठा रही हैं।