फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   palampur agriculture university study uterine infection in crossbred cows

हिमाचल: बच्चेदानी का संक्रमण गायों को बना रहा बांझपन का शिकार, पालमपुर कृषि विवि के वैज्ञानिकों का बड़ा अध्ययन

Wed, 23 Sep 2026 10:25 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 23 Sep 2026 10:25 AM IST
सार

पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जर्सी नस्ल की संकर गायों पर अध्ययन में प्रजनन संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा है। 43 गायों की जांच में 33 यानी 76.74 फीसदी में बच्चेदानी की अंदरूनी परत का संक्रमण पाया गया। संक्रमण वाली 33 गायों में से 96.97 फीसदी में गर्भधारण से पहले बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। 

विज्ञापन
palampur agriculture university study uterine infection in crossbred cows
गायों में छिपा संक्रमण! - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बार-बार गर्भाधान के बावजूद गर्भधारण नहीं करने वाली गायों में बच्चेदानी की अंदरूनी परत का छिपा संक्रमण प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विवि के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जर्सी नस्ल की संकर गायों पर अध्ययन कर यह तथ्य सामने रखा है। 43 गायों की जांच में 33 यानी 76.74 फीसदी में बच्चेदानी की अंदरूनी परत का संक्रमण पाया गया। इसमें बच्चेदानी की अंदरूनी परत में सूजन और संक्रमण रहता है, लेकिन इसके स्पष्ट बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देते।

विज्ञापन


अध्ययन में संक्रमण वाली 33 गायों में से 96.97 फीसदी में गर्भधारण से पहले की अवस्था में बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया की पहचान और दवा के प्रति उसकी संवेदनशीलता के आधार पर उपचार किया। उपचार से बैक्टीरिया कम हुआ। अंडोत्सर्जन से पहले बनने वाली पुटिका के आकार में वृद्धि, प्रजनन से जुड़े एस्ट्राडियोल व एलएच हार्मोन के स्तर में बदलाव दर्ज किया गया। अध्ययन में 18 गायों में मदावस्था के दौरान सामान्य से अधिक प्रोजेस्टेरोन पाया गया। इस समूह में उपचार से पहले प्रोजेस्टेरोन का औसत स्तर 0.81 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर था, जो उपचार के बाद घटकर 0.44 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर रह गया। इन गायों में संक्रमण की मात्रा अधिक तथा एस्ट्राडियोल और एलएच हार्मोन का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया।

विज्ञापन

उपचार के बाद गायों को तीसरे प्रजनन चक्र से तीन बार तक कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। इसके बाद कुल गर्भधारण दर 75.8 फीसदी रही। हालांकि, उपचार के बाद तीसरे चक्र में बैक्टीरिया की मौजूदगी, उसकी संख्या या मात्रा और गर्भधारण दर के बीच सीधा संबंध नहीं मिला। यह शोध विजेंद्र नेगी, पंकज सूद, अंकित आहूजा, रोहित मनकोटिया, आरुषि शर्मा, निशांत कुमार, सुनील कुमार और आंचल बख्शी ने किया है। शोध ‘रिप्रोडक्शन इन डोमेस्टिक एनिमल्स’ नामक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित हुआ। अध्ययन का उद्देश्य बार-बार गायों में बच्चेदानी के छिपे संक्रमण, प्रोजेस्टेरोन के असामान्य स्तर और प्रजनन संबंधी गड़बड़ियों के बीच संबंध का पता लगाना था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed