1965 के युद्ध में पाकिस्तान ने हिमाचल के इस शहर पर किया था हमला
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जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव होता है तो योल छावनी के चलते सूबे में अलर्ट रहता है। वर्ष 1965 में पाकिस्तान की वायुसेना ने योल छावनी को निशाना बनाकर धर्मशाला में बम गिराए थे।
9 सितंबर को पाकिस्तान की वायुसेना का एक विमान शाम को आठ बजे के आसपास धर्मशाला पहुंचा था। चरान खड्ड और अपर बड़ोल में बम गिराए थे। इनमें अपर बड़ोल में गिराया बम ही फटा था। इससे लगभग 70 फीट चौड़ा और 70 फीट गहरा गड्ढा हो गया था।
इसकी चपेट में आने से अर्जुन सिंह (31) की मौत हो गई थी। चरान खड्ड के समीप गिराया बम नहीं फटा था। सेवानिवृत्त सैनिक सुरमा राम ने कहा कि उनके घर के पीछे बम गिरा था। इसकी चपेट में आने से उनके चाचा अर्जुन सिंह की मौत हो गई थी। उस समय अपर बड़ोल में कम घर थे।
रात को लाइट न जलाने की थी हिदा
बम फटने से उनके घर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। कहा कि वे 15 फरवरी, 1967 में सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी है। उनके भाई किशन चंद जो आज दुनिया में नहीं हैं, उन्होंने डोगरा रेजिमेंट से 1965 का युद्ध लड़ा था।
कहा कि उस दौरान धर्मशाला के आसपास के लोगों ने 1600 रुपये एकत्रित कर उनके परिवार को दिए थे। बताया जाता है कि पाकिस्तान वायुसेना के विमान को पठानकोट में पकड़ लिया गया था।
पायलट ने पूछताछ में बताया था कि उसने योल छावनी में बम नहीं गिराए हैं। धर्मशाला कॉलेज में पढ़ा होने के कारण उसे यहां की भौगोलिक स्थिति की जानकारी थी। ऐसे में खाली जगह ही बम फेंके हैं।
उस समय धर्मशाला के आसपास के लोगों को लाइट न जलाने की हिदायत दी जाती थी, ताकि पाकिस्तान की वायुसेना को आबादी वाला क्षेत्र होने की सूचना न मिल सके।