हिमाचल में खरीदी जमीन को बेचकर अब लौटने लगे लोग
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सालों से देवभूमि में बसे बाहरी राज्यों के कई लोगों का हिमाचल से दिल भर गया है। ये लोग अब अपने प्रदेश लौटना चाहते हैं। इन लोगों ने धारा-118 के तहत हिमाचल में जमीनें खरीदी हैं।
प्रॉपर्टी को बेचने के लिए इन लोगों ने धारा-118 के तहत सरकार के पास जमीन बेचने को आवेदन किया है। पांच ऐसे लोगों को सरकार ने जमीन बेचने की अनुमति भी दे दी है। ये लोग मुंबई, तेलंगाना, हरियाणा, पंजाब और बंगलूरू के हैं।
हालांकि, सरकार ने जमीन बेचने के लिए शर्त लगाई है कि ये लोग केवल हिमाचली कृषक को ही जमीन बेच सकते हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि हिमाचल में खरीदी गई जमीन को आगे से आगे मुनाफे के चक्कर में न बेचा जाए।
इन लोगों ने शिमला, सोलन, कसौली जैसे क्षेत्रों में जमीनें खरीदी हैं। कुछेक ने जमीन पर मकान बनाए हैं, जबकि कइयों ने फेसिंग करके कंस्ट्रक्शन की है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में धारा-118 के तहत जमीन खरीदने की अनुमति के बाद खरीदारों को इसकी सूचना सरकार को देनी होती है।
सरकार ने इन्हें दी जमीन बेचने की मंजूरी
जिस दिन जमीन का लेनदेन होता है, उसके तीन साल के भीतर कंस्ट्रक्शन करनी होती है। चंडीगढ़ निवासी विंग कमांडर हरिंद्र पाल सिंह को जिला सोलन के कंडाघाट में 140 वर्ग मीटर जमीन बेचने की अनुमति दी गई है।
हरियाणा के गुड़गांव की किरण मल्होत्रा को जिला सोलन के कसौली में 13 बिस्वा बेचने की मंजूरी मिली है। पंचकूला निवासी सुषमा वर्मा को सोलन में पांच बिस्वा जमीन और उस पर बने मकान को बेचने की स्वीकृति मिली है।
तेलंगाना के सिकंदराबाद की निवासी शालिनी राजन को भी सोलन के कसौली में 13 बिस्वा जमीन बेचने की अनुमति मिली है। मुंबई निवासी नरेण नरवाणी को शिमला ग्रामीण के छकड़याल में फ्लैट बेचने को मंजूरी दी गई है।