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Shimla News: एचपी बोर्ड के स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम आरंभ करने का विरोध
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राष्ट्रीय विकास संस्था ने जताई आपत्ति
बोले, प्रारंभिक शिक्षा से लागू होना चाहिए सीबीएसई
तबादले होने पर सीबीएसई स्कूल न मिलने पर होगी दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने के सरकार के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। राष्ट्रीय विकास संस्था ने सरकार की मंशा और नीति पर आपत्ति जताई है।
संस्था का मानना है कि सीबीएसई प्रारंभिक शिक्षा से शुरू की जानी चाहिए थी ताकि बच्चे शुरू से ही सीबीएसई पैटर्न को आसानी से समझ सकें। बड़ी कक्षाओं के छात्रों को अचानक दूसरे बोर्ड में शिफ्ट होने से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। शिक्षकों को भी नए पाठ्यक्रम में पढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रीय विकास संस्था के प्रधान डॉक्टर ओपी शर्मा और वरिष्ठ उप प्रधान राजेश शर्मा ने कहा कि संस्था सीबीएसई पैटर्न का विरोध नहीं करती है लेकिन इसे प्रदेश के सभी विद्यालयों में ठीक ढंग से लागू किया जाता तो ज्यादा बेहतर हो सकता था। प्रदेश में जिन कर्मचारियों के तबादले होंगे उनको नए स्थान पर अपने बच्चों को बार-बार स्कूल बदलने पर भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। यदि ऐसे बच्चों को नए स्थान पर सीबीएसई पैटर्न का स्कूल नहीं मिला तो लगभग 15 किलोमीटर का सफर प्रतिदिन तय करना पड़ेगा
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बोले, प्रारंभिक शिक्षा से लागू होना चाहिए सीबीएसई
तबादले होने पर सीबीएसई स्कूल न मिलने पर होगी दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने के सरकार के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। राष्ट्रीय विकास संस्था ने सरकार की मंशा और नीति पर आपत्ति जताई है।
संस्था का मानना है कि सीबीएसई प्रारंभिक शिक्षा से शुरू की जानी चाहिए थी ताकि बच्चे शुरू से ही सीबीएसई पैटर्न को आसानी से समझ सकें। बड़ी कक्षाओं के छात्रों को अचानक दूसरे बोर्ड में शिफ्ट होने से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। शिक्षकों को भी नए पाठ्यक्रम में पढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रीय विकास संस्था के प्रधान डॉक्टर ओपी शर्मा और वरिष्ठ उप प्रधान राजेश शर्मा ने कहा कि संस्था सीबीएसई पैटर्न का विरोध नहीं करती है लेकिन इसे प्रदेश के सभी विद्यालयों में ठीक ढंग से लागू किया जाता तो ज्यादा बेहतर हो सकता था। प्रदेश में जिन कर्मचारियों के तबादले होंगे उनको नए स्थान पर अपने बच्चों को बार-बार स्कूल बदलने पर भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। यदि ऐसे बच्चों को नए स्थान पर सीबीएसई पैटर्न का स्कूल नहीं मिला तो लगभग 15 किलोमीटर का सफर प्रतिदिन तय करना पड़ेगा
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