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हिमाचली सेब में स्कैब हमले से हड़कंप, अफसरों की छुट्टियां रद्द

Wed, 26 Jun 2019 10:21 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 26 Jun 2019 10:21 AM IST
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officials holidays  due to scab attack on apple in himachal

 हिमाचल के सेब बगीचों में स्कैब के हमले से हड़कंप मच गया है। सेब को स्कैब से बचाने के लिए प्रदेश सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है। प्रदेश में 4500 करोड़ का कारोबार करके देने वाले सेब की फसल को रोगमुक्त करने के लिए सरकार ने विभागीय अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

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अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बागवानों को तुरंत आवश्यक सहायता दी जाए। अधिकारी आवश्यक दवाइयों की प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति करवाएंगे और छिड़काव संबंधी जानकारी भी देंगे। 37 साल बाद सेब बगीचों में इस महामारी की दस्तक ने बागवानों की परेशानी बढ़ा दी है।
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बगीचों में 1982 में स्कैब करोड़ों का नुकसान कर चुका है। बागवानी निदेशक डॉ. एमएल धीमान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फफूंद से लगने वाले स्कैब रोग की रोकथाम के लिए उद्यान अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
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विभाग हर वर्ष डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विवि नौणी के सहयोग से रोग पर काबू पाने को छिड़काव सारिणी तैयार करवाता है। इसके अनुसार आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाता है। विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए निदेशालय स्तर पर एक समिति का गठन किया है।

बागवान करें दवाओं का छिड़काव

जो रोग के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आवश्यक दवाइयां को प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति एवं वितरण पर निगरानी रखेगी। इस वर्ष फरवरी से ही उच्च आर्द्रता का वातावरण बना है। इससे इस रोग के बीजाणु पनप रहे हैं। 

डॉ. धीमान ने कहा कि अखरोट के आकार के सेब पर मेन्कोजेब या प्रोपिनेब या डोडीन अथवा माइक्लोबुटानिल का छिड़काव करें। छिड़काव के एक-दो घंटे बाद बारिश होती है तो दूसरे दिन फिर छिड़काव करें। 

फफूंद से होता स्कैब रोग
कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के बागवानी विशेषज्ञ एवं प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ ने कहा कि स्कैब फंफूद से पैदा होने वाली बीमारी है। पत्तियों में फैलने से समय से पहले बगीचों में पतझड़ शुरू हो जाती है। जहां स्कैब फैल चुका है, वहां उसे अभी रोका जा सकता है। बीमारी से ग्रस्त फल ठीक नहीं हो सकते।

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