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अब 10 मिनट में होगा टायफायड टेस्ट, चुकाने होंगे सिर्फ 35 से 40 रुपये, जानिए कैसे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 16 Feb 2018 03:29 PM IST
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फाइल फोटो
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फतेहपुर के गांव वडियाली की प्रीति पठानिया ने ढाई वर्ष की रिसर्च के बाद टाइफाइड के मरीजों को महंगे वीडॉल टेस्ट से निजात का हल निकाला है। रिसर्च कर प्रीति ने एक ऐसी बायोमेडिकल डिवाइस तैयार की है जो टाइफाइड के बैक्टीरिया सालमोनेला टाइफी की भी तुरंत पहचान कर लेगी। इस टेस्ट के लिए मरीजों का महज 35 से 40 रुपये खर्चा आएगा।
टेस्ट रिपोर्ट भी 95 फीसदी सही होगी। ईजाद डिवाइस का बाकायदा पीजीआई चंडीगढ़ के मरीजों पर परीक्षण किया जा चुका है। 34 मरीजों पर परीक्षण के बाद इस डिवाइस की रिपोर्ट 95 फीसदी सही पाई गई है। प्रीति की मानें तो अभी तक टाइफाइड की जांच के लिए मरीजों का वीडॉल व टाइफैक्स टेस्ट ही होता है।
इसके लिए करीब 200 से 350 रुपये मरीजों का खर्चा आता है। इस टेस्ट की विश्वसनीयता भी 35 से 40 फीसदी ही रहती है। जबकि नए ईजाद डिवाइस की रिपोर्ट के लिए मरीज को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। महज 8 से 10 मिनट में यह डिवाइस रिपोर्ट देगी।
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इसमें सेंसर व नैनो तकनीक का प्रयोग किया गया है। टाइफाइड की जांच के लिए डिवाइस में मरीज का खून डालना होगा। इसमें मौजूद रीडर पुष्टि बताएगा कि खून में बैक्टीरिया है या नहीं। मोबाइल के आकार की इस डिवाइस को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसकी कीमत करीब दस हजार रुपये तक होगी।
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टेस्ट रिपोर्ट भी 95 फीसदी सही होगी। ईजाद डिवाइस का बाकायदा पीजीआई चंडीगढ़ के मरीजों पर परीक्षण किया जा चुका है। 34 मरीजों पर परीक्षण के बाद इस डिवाइस की रिपोर्ट 95 फीसदी सही पाई गई है। प्रीति की मानें तो अभी तक टाइफाइड की जांच के लिए मरीजों का वीडॉल व टाइफैक्स टेस्ट ही होता है।
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इसके लिए करीब 200 से 350 रुपये मरीजों का खर्चा आता है। इस टेस्ट की विश्वसनीयता भी 35 से 40 फीसदी ही रहती है। जबकि नए ईजाद डिवाइस की रिपोर्ट के लिए मरीज को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। महज 8 से 10 मिनट में यह डिवाइस रिपोर्ट देगी।
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इसमें सेंसर व नैनो तकनीक का प्रयोग किया गया है। टाइफाइड की जांच के लिए डिवाइस में मरीज का खून डालना होगा। इसमें मौजूद रीडर पुष्टि बताएगा कि खून में बैक्टीरिया है या नहीं। मोबाइल के आकार की इस डिवाइस को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसकी कीमत करीब दस हजार रुपये तक होगी।
इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी की रिसर्च स्कॉलर प्रीति पठानिया ने पीएचडी चंडीगढ़ में की है। जमा दो की शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहपुर से की है। पिता शक्ति पठानिया हिमाचल पुलिस से एसएचओ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। माता किरण वाला गृहिणी हैं।
जनहित के लिहाज से महत्वपूर्ण डिवाइस की प्रेजेंटेशन जल्द ही नीति आयोग के सदस्य विनोद पाल के सामने दी जाएगी। जिसके बाद डिवाइस का लाभ मरीजों को मिलना शुरू हो जाएगा। प्रीति के गाइड इकटेक से डॉ. रमन सूरी व पंजाब यूनिवर्सिटी से डॉ. प्रवीण सूरी रहे हैं।
प्रीति ने कहा कि उसने बारहवीं की पढ़ाई सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहपुर में 2006 में करने के पश्चात अमृतसर यूनिवर्सिटी में 2009 बीएससी की पढ़ाई पूरी की। शिमला यूनिवर्सिटी से 2011 में एमएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2018 में उसने रिसर्च पूरी की है।
जनहित के लिहाज से महत्वपूर्ण डिवाइस की प्रेजेंटेशन जल्द ही नीति आयोग के सदस्य विनोद पाल के सामने दी जाएगी। जिसके बाद डिवाइस का लाभ मरीजों को मिलना शुरू हो जाएगा। प्रीति के गाइड इकटेक से डॉ. रमन सूरी व पंजाब यूनिवर्सिटी से डॉ. प्रवीण सूरी रहे हैं।
प्रीति ने कहा कि उसने बारहवीं की पढ़ाई सीनियर सेकेंडरी स्कूल फतेहपुर में 2006 में करने के पश्चात अमृतसर यूनिवर्सिटी में 2009 बीएससी की पढ़ाई पूरी की। शिमला यूनिवर्सिटी से 2011 में एमएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2018 में उसने रिसर्च पूरी की है।