Road Reconstruction: हिमाचल में अब इस तकनीक से होगा सड़कों का पुर्ननिर्माण
सड़कों का पुर्ननिर्माण फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से होगा। पहली बार बनने जा रही करीब सात किलोमीटर गाहर-केट संपर्क सड़क का पुननिर्माण कार्य शुरू हुआ।
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हिमाचल प्रदेश में सड़कों का पुर्ननिर्माण फुल डैप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से होगा। पहली बार बनने जा रही करीब सात किलोमीटर गाहर-केट संपर्क सड़क के पुननिर्माण कार्य का तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शुभारंभ किया। यह कार्य उत्तर प्रदेश की निर्भय कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी, वहीं पर्यावरण को बचाने में भी एफडीआर तकनीक कारगर है। प्रदेश सरकार की इस पहल को धरातल पर उतारने की प्रकिया शुरू हो गई है। घुमारवीं उपमंडल के गाहर-केट संपर्क सड़क को एफडीआर तकनीक से बनाने का कार्य शुरू हो गया है। पुरानी सड़क को उखाड़कर बजरी व अन्य सामग्री को तैयार किया जाता है, जिससे सड़क का पुनर्निर्माण किया जाता है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के साथ गुणवत्ता युक्त सड़कें बनाने में एफडीआर तकनीक बेहद कारगर है। शुरुआती दौर में इस तकनीक से प्रदेश में 113 सड़कें बनाई जाएंगी। सड़कों के 1,180 किलोमीटर हिस्से को एफडीआर तकनीक से बनाया जाएगा। कहा कि हिमाचल में पहले सड़कों के निर्माण के लिए खड्डों से बजरी और सामग्री आती थी जिस कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचता था। अब इस तकनीक से पुरानी सड़क से जो सामग्री निकलेगी उसे अलग-अलग करके साफ किया जाएगा। फिर केमिकल की मदद से बजरी, रेत तैयार करके सड़क के लिए इस्तेमाल होगी।
धर्माणी ने कहा कि इस तकनीक को धरातल पर उतारने से पहले कंपनी ने गाहर-केट सड़क के सैंपल लिए थे, जिन्हें रुड़की की प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से सैंपल पास होने के बाद अब सड़क का कार्य शुरू किया गया है। इस मौके पर अधिशासी अभियंता मनीष सहगल, एसडीओ रत्न, जेई बालमुकंद, सड़क निर्माण कर रही कंपनी के अधिकारी, राकेश भारद्वाज, मेहर चंद आदि उपस्थित रहे।
यह है एफडीआर तकनीकएफडीआर तकनीक से गिट्टी युक्त पुरानी सड़क को उपकरणों से उखाड़कर बारीक टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाता है।
सड़क की पपड़ी को रीसाइकिल कर सड़क पर बिछाकर समतल किया जाता है। सीमेंट में चिपकने वाले केमिकल मिलाकर उसका घोल तैयार कर समतल किए गए हिस्से पर डाला जाता है। फिर इसे रीसाइक्लर और मोटर ग्रेडर उपकरणों से रोल करने के बाद पैड फुट रोलर और कॉम्पैक्टर से दबाया जाता है। इसके बाद सात दिनों तक पानी से तराई की जाती है। फिर यातायात का दबाव झेलने के लिए सतह के रूप में स्ट्रेस अब्सॉर्बिंग इंटर लेयर तैयार की जाती है। इसके ऊपर पेवर मशीन से बिटुमिन कंक्रीट बिछाकर उस पर रोलर चलाया जाता है।