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पठानकोट हमला: बदलेगा वायुसेना का ठिकाना, यहां बनेगा नया एयरबेस

Sun, 23 Oct 2016 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कांगड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, कांगड़ा Updated Sun, 23 Oct 2016 09:55 AM IST
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Now Airforce New AirBase will Be Made at Kangra.

जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद हिमाचल के कांगड़ा में सामरिक महत्व का एक बड़ा एयरबेस बनाने की तैयारी तेज हो गई है। मोदी सरकार चीन और पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से साधने के लिए विकल्प के तौर पर हिमाचल को सुरक्षित ठिकाने के रूप में विकल्प बना रही है।

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कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तारीकरण कर इसे सेना के एयरबेस में तब्दील किया जाएगा ताकि पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध के समय दुश्मन पर हमला करने के लिए विकल्प के तौर पर महफूज ठिकाना हो। यह पठानकोट के मुकाबले पाक सीमा से ज्यादा सुरक्षित दूरी पर है।
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इस एयरबेस में थल सेना का भी ठिकाना होगा। शनिवार को धर्मशाला मुख्यालय में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, वायुसेना, आर्मी और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ उपायुक्त सीपी वर्मा ने उच्चस्तरीय बैठक की। चर्चा हुई कि कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार करके इसी को एयरबेस में तब्दील किया जाए। यहां से सेना और सिविल पैसेंजर विमान दोनों उड़ेंगे।

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इसलिए जरूरी है एयरबेस

Now Airforce New AirBase will Be Made at Kangra.

बैठक में वायुसेना ने एयरबेस के लिए जिला प्रशासन से 400 हेक्टेयर जमीन मांगी। सेना ने एयरपोर्ट के साथ अपना बेस बनाने के लिए 15 हेक्टेयर जमीन मांगी है। हवाई अड्डे के विस्तारीकण के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी जिला प्रशासन से 153 हेक्टेयर जमीन की मांग रखी है। उपायुक्त वर्मा ने बताया कि मांगी गई जमीन के प्रस्ताव पर वर्क आउट कर इसे एक हफ्ते के भीतर भारत सरकार को भेज दिया जाएगा।

इसलिए जरूरी है एयरबेस
वायुसेना के अफसरों ने पिछले साल भी जिला प्रशासन के साथ बैठक की थी। इसमें जिला प्रशासन से अलग से जमीन मांगी गई थी। कांगड़ा एयरपोर्ट से 14 किलोमीटर दूर योल स्थित आर्मी की 9वीं कोर भी है। योल कैंट 9वीं कोर के अधीन पठानकोट, धर्मशाला, पालमपुर, सांबा और कठुआ आदि महत्वपूर्ण मिलिट्री स्टेशन आते हैं। कांगड़ा से पाकिस्तान का बॉर्डर करीब 450 किलोमीटर है जबकि किन्नौर की सीमा के पास चीन बॉर्डर है।

कई गांवों को झेलना पड़ेगा विस्थापन का दंश

Now Airforce New AirBase will Be Made at Kangra.

अगर कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार होता है तो करीब 570 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होगी। ऐसे में कांगड़ा एयरपोर्ट के पास भूमि अधिग्रहण के लिए कई गांव उजड़ जाएंगे। सैकड़ों पेड़ भी कटेंगे। विस्थापन का दंश गगल, सनौरा, कुठमां, ढुगियारी, इच्छी आदि गांवों को झेलना पड़ सकता है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कांगड़ा एयरपोर्ट का रनवे 500 मीटर और बढ़ाने के लिए 153 हेक्टेयर जमीन की मांग की है। वर्तमान में कांगड़ा एयरपोर्ट का रनवे 1372 मीटर है। इस रनवे पर बड़े जहाज नहीं उतर पाते हैं। इसके चलते हवाई जहाज में यात्री कम आ पाते हैं और किराया बढ़ जाता है। रनवे बढ़ने से बड़े जहाज उतरने के चलते विमान यात्री किराया कम हो जाएगा। - परविंद्र तिवारी, निदेशक, कांगड़ा एयरपोर्ट

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