{"_id":"5e3590e08ebc3e4b3b1e2f78","slug":"not-a-populist-the-budget-is-going-to-deal-with-the-current-situation-prof-sharda","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकलुभावन नहीं, मौजूदा परिस्थितियों से निपटने वाला है बजट: प्रो. शारदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकलुभावन नहीं, मौजूदा परिस्थितियों से निपटने वाला है बजट: प्रो. शारदा
Sun, 02 Feb 2020 11:47 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 02 Feb 2020 11:47 AM IST
विज्ञापन
प्रो. एनके शारदा
- फोटो : अमर उजाला
प्रो. एनके शारदा के अनुसार केंद्र सरकार का बजट लोक लुभावन नहीं है, मगर यह देश में मौजूदा मंदी के दौर को देखते हुए सही कहा जा सकता है। बजट मध्यम वर्ग की आशाओं के प्रतिकूल माना जा रहा है। उद्योग और व्यापार जगत में भी इसको लेकर उत्साह कम है। बजट में सरकार ने मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योग को बढ़ावा देने को रियायतें दी हैं। वहीं, देश में रेलवे, परिवहन, उड्ययन, पर्यटन जैसे क्षेत्रों को निजी क्षेत्र की सहभागिता से आगे लेकर जाने के कदम उठाए हैं। ये बेरोजगारी की समस्या को हल करने में मददगार साबित हो सकते है।
विज्ञापन
मध्यम वर्ग की आयकर को लेकर उपेक्षा अनुकूल नहीं है, मगर इससे नुकसान भी कोई नहीं है। इसमें टैक्स अदा करने और छूट पाने को नए-पुराने और नई दरों का विकल्प है। आंगनबाड़ी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा कवर देने का प्रयास है। ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, रेलवे स्टेशन में वाई फाई सुविधा उद्योग संरचना में अच्छा कदम माना जा सकता है। एलआईसी और आईडीबीआई बैंक के सरकारी हिस्सेदारी का विनिवेश करने का निर्णय राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने को आवश्यक था, आम जनता इस फैसले को संदेहास्पद मान रही है, इसलिए उनके जमा खातों की सुरक्षा को देख सरकार विनिवेश में पारदर्शिता रखे।
विज्ञापन