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Shimla News: न्यू ओपीडी में विभागों में एक्सरे मशीनें नहीं, मरीज खा रहे धक्के
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खास खबर
आईजीएमसी में ब्लॉक बी और डी में ही हैं एक्सरे मशीन, हड्डी रोगियों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
गंभीर मरीजों को लाने ले जाने में हो रही दिक्कत
रोजाना सैकड़ों मरीजों को लिखे जाते हैं एक्सरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के न्यू ओपीडी भवन में विभागों के पास अलग-अलग एक्सरे कक्ष नहीं हैं। इस कारण मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक तक जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में फिलहाल केवल ब्लॉक बी और ब्लॉक डी में ही एक्सरे कक्ष स्थापित हैं। ऐसे में विभिन्न विभागों के मरीजों के सभी एक्सरे इन्हीं दो ब्लॉकों में किए जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी हड्डी रोग विभाग के मरीजों को हो रही है। गंभीर मरीजों को ओपीडी में चिकित्सकीय जांच के बाद एक्सरे करवाने के लिए व्हील चेयर या स्ट्रेचर के माध्यम से एक्सरे कक्ष तक ले जाना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त कठिनाई झेलनी पड़ रही है।मेडिसिन ओपीडी में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। एक सप्ताह से अधिक समय से खांसी से पीड़ित मरीजों को चिकित्सक अक्सर छाती का एक्सरे कराने की सलाह देते हैं। ऐसे में इन मरीजों को भी डी ब्लॉक स्थित एक्सरे कक्ष के बाहर लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है।
आईजीएमसी में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। हड्डी रोग और मेडिसिन विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। दवा लिखने से पहले बड़ी संख्या में मरीजों को एक्सरे की जरूरत पड़ती है, लेकिन अलग-अलग विभागों में सुविधा उपलब्ध न होने से उन्हें एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक तक भटकना पड़ता है। अधिकांश मरीज डी ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर स्थित एक्सरे कक्ष में पहुंचते हैं, जहां उन्हें लंबा इंतजार भी करना पड़ता है।
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एक्सरे की पर्ची नहीं तो फिर लगानी पड़ेगी दौड़
आईजीएमसी में कई बार मरीज या उनके तीमारदार एक्सरे कक्ष तक पहुंच जाते हैं, लेकिन उनके पास एक्सरे की अलग पर्ची नहीं होती। ऐसे में चिकित्सक की ओपीडी पर्ची दिखाने पर उन्हें पंजीकरण काउंटर से अलग से एक्सरे पर्ची बनवाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद तीमारदारों को दोबारा ओपीडी के पंजीकरण काउंटर तक जाना पड़ता है। ब्लॉक बी और डी में अलग से पंजीकरण काउंटर न होने के कारण यह प्रक्रिया मरीजों और उनके परिजनों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रही है।
हर ओपीडी में एक्सरे मशीन लगाने के हैं निर्देश
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने आईजीएमसी के दौरे के दौरान अस्पताल प्रबंधन को प्रत्येक ओपीडी के निकट एक्सरे मशीन स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में शीघ्र कार्य योजना तैयार करें ताकि मरीजों को अनावश्यक आवाजाही और परेशानी से राहत मिल सके।
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आईजीएमसी में ब्लॉक बी और डी में ही हैं एक्सरे मशीन, हड्डी रोगियों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
गंभीर मरीजों को लाने ले जाने में हो रही दिक्कत
रोजाना सैकड़ों मरीजों को लिखे जाते हैं एक्सरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के न्यू ओपीडी भवन में विभागों के पास अलग-अलग एक्सरे कक्ष नहीं हैं। इस कारण मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक तक जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में फिलहाल केवल ब्लॉक बी और ब्लॉक डी में ही एक्सरे कक्ष स्थापित हैं। ऐसे में विभिन्न विभागों के मरीजों के सभी एक्सरे इन्हीं दो ब्लॉकों में किए जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी हड्डी रोग विभाग के मरीजों को हो रही है। गंभीर मरीजों को ओपीडी में चिकित्सकीय जांच के बाद एक्सरे करवाने के लिए व्हील चेयर या स्ट्रेचर के माध्यम से एक्सरे कक्ष तक ले जाना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त कठिनाई झेलनी पड़ रही है।मेडिसिन ओपीडी में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। एक सप्ताह से अधिक समय से खांसी से पीड़ित मरीजों को चिकित्सक अक्सर छाती का एक्सरे कराने की सलाह देते हैं। ऐसे में इन मरीजों को भी डी ब्लॉक स्थित एक्सरे कक्ष के बाहर लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है।
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आईजीएमसी में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। हड्डी रोग और मेडिसिन विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। दवा लिखने से पहले बड़ी संख्या में मरीजों को एक्सरे की जरूरत पड़ती है, लेकिन अलग-अलग विभागों में सुविधा उपलब्ध न होने से उन्हें एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक तक भटकना पड़ता है। अधिकांश मरीज डी ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर स्थित एक्सरे कक्ष में पहुंचते हैं, जहां उन्हें लंबा इंतजार भी करना पड़ता है।
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एक्सरे की पर्ची नहीं तो फिर लगानी पड़ेगी दौड़
आईजीएमसी में कई बार मरीज या उनके तीमारदार एक्सरे कक्ष तक पहुंच जाते हैं, लेकिन उनके पास एक्सरे की अलग पर्ची नहीं होती। ऐसे में चिकित्सक की ओपीडी पर्ची दिखाने पर उन्हें पंजीकरण काउंटर से अलग से एक्सरे पर्ची बनवाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद तीमारदारों को दोबारा ओपीडी के पंजीकरण काउंटर तक जाना पड़ता है। ब्लॉक बी और डी में अलग से पंजीकरण काउंटर न होने के कारण यह प्रक्रिया मरीजों और उनके परिजनों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रही है।
हर ओपीडी में एक्सरे मशीन लगाने के हैं निर्देश
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने आईजीएमसी के दौरे के दौरान अस्पताल प्रबंधन को प्रत्येक ओपीडी के निकट एक्सरे मशीन स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में शीघ्र कार्य योजना तैयार करें ताकि मरीजों को अनावश्यक आवाजाही और परेशानी से राहत मिल सके।