हिमाचली सेब पर मंडराया संकट, तबाह हो सकती है फसल
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हिमाचल में दिसंबर और जनवरी माह में बर्फबारी न होने के कारण अरबों की सेब फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जनवरी का आधा महीना बीत गया है और पहाड़ों पर बर्फ नहीं है। ऐसे में सेब के लिए वांछित चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने की चिंता गहरा गई है। खासकर निचली सेब बेल्ट के बागवानों की फसल तबाह होने की आशंका है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अगले एक सप्ताह तक बारिश और बर्फबारी के कोई आसार नहीं हैं। मौसम की इस बेरुखी के चलते प्रदेश में गेहूं की फसल भी पीली पड़ने लगी हैं। पीता रतुआ का प्रकोप शुरू हो गया है। अन्य नकदी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ रही है।
सेब की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है ये बातें
सेब की अच्छी फसल के लिए जरूरी है कि सर्दियों में पौधों के डोरमेंसी पीरियड में ही इनके चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएं। यानी 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में सेब की अलग-अलग किस्मों के पेड़ों का 800 से 1800 घंटे के बीच रहना जरूरी होता है।
रॉयल जैसी किस्मों में तो ये जरूरत 1600 से 1800 घंटे तक की होती है। प्रदेश में 80 फीसदी से ज्यादा परंपरागत किस्में ही फल दे रही हैं। चिलिंग ऑवर्स पूरे होने पर ही सेब के पौधों में ठीक से स्पर आते हैं और इनकी फ्लावरिंग होती है।
इस पर ही फल टिकाऊ और अच्छे रंग-आकार का होता है। कीटों व रोगों का प्रकोप भी कम होता है। मौसम की बेरुखी के चलते इस बार चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हो पा रहे हैं। निचली बेल्ट में बिना चिलिंग आवर्स पूरे हुए स्पर फूटना शुरू हो गया है।
हिमाचल में 3200 करोड़ का कारोबार
हिमाचल में सेब का सालाना कारोबार लगभग 3200 करोड़ का होता है। सेब शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी, चंबा, सिरमौर आदि जिलों में होता है। इस साल इस कारोबार पर अभी से संकट मंडराने लगा है।
पांच साल में दिसंबर-जनवरी में कितनी बर्फ
सेब बहुल क्षेत्र जिला शिमला में वर्ष 2015 में दिसंबर महीने में महज 0.3 सेंटीमीटर बर्फ ही गिरी है जबकि दिसंबर 2014 में 38.1, 2013 में 7.8 और 2012 में 9.0 सेंटीमीटर हिमपात हुआ था। इस बार जनवरी में अभी तक हिमपात नहीं हुआ है, जबकि जनवरी 2015 में 10.7, 2014 में 25.3, 2013 में 63.6 और 2012 में 95.0 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी।
चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होने से सेब फसल संकट में है। इसका सेब की उपज पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे सेब के पेड़ों में रोग बढ़ सकते हैं। कीटों का प्रभाव भी बढ़ जाता है। बागवानों की नजरें मौसम के रुख पर टिकी हैं। अगर आगे भी मौसम साफ ही रहा तो इससे नुकसान हो सकता है।-डा. डीपी भंगालिया, निदेशक, हिमाचल प्रदेश बागवानी निदेशालय, शिमला