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Shimla News: निर्जला एकादशी आज, सभी एकादशियों के बराबर मिलता है लाभ

Thu, 05 Jun 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 11:59 PM IST
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Nirjala Ekadashi today, benefits are equal to all Ekadashis
एकादशी का मुहूर्त रात सवा दो बजे होगा शुरू, पारण सात जून को सुबह 7:04 बजे के बाद होगा
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भगवान विष्णु का गंगाजल से करें अभिषेक : नौटियाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के रूप में मनाई जाती है।
गंज बाजार के राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि निर्जला एकादशी व्रत इस बार 6 जून को रखा जाएगा। यह व्रत वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को करने से सभी एकादशियों का लाभ प्राप्त होता है। इस वर्ष एकादशी व्रत की तिथि 6 जून को रात 2:15 बजे से शुरू होगी और सात जून को सुबह 4:47 बजे तक रहेगी। निर्जला एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त 7 जून को सुबह 7:04 से 10:35 बजे तक होगा।

निर्जला एकादशी व्रत में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल को साफ कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करके श्री हरि को पुष्प, फल, तुलसी पत्ते और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती और उन्हें भोग लगाकर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करना शुभ होता है। पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि यह व्रत सबसे कठिन होता है, इसलिए इसे व्रत को तपस्या के बराबर माना जाता है। यह व्रत करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और कष्ट दूर हो जाते हैं। बताया कि इस व्रत के दिन जल दान सबसे बड़ा दान होता है, इस दिन घड़े या सुराही में ठंडा जल भरकर दान करना फलदायी होता है। पंडित ने बताया कि सिर्फ पानी पीकर व्रत पारण किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा और उन्हें भोग लगाकर भोजन कर सकते हैं।
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एकादशी व्रत सामग्री
राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र कलश (तांबे या मिट्टी) की पूजा करें। पूजा में नारियल और सुपारी, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), तुलसी के पत्ते, मिठाई और पंचमेवा, पीला वस्त्र, पीला फूल, चंदन, धूप, दीप, कपूर और अगरबत्ती, तिल और कुमकुम का उपयोग किया जाता है।
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इसलिए किया जाता है निर्जला एकादशी व्रत
हिंदू धर्म ग्रंथों में माना जाता है कि पांडव भीम ने एक बार सभी एकादशियों पर उपवास करने का फैसला किया था लेकिन वह अपनी भूख को नियंत्रित करने में असमर्थ रहे। इसके बाद वह सलाह के लिए ऋषि व्यास के पास गए तब ऋषि व्यास ने उन्हें सालभर में आने वाली सभी 24 एकादशियों का लाभ पाने के लिए निर्जला एकादशी व्रत रखने का सुझाव दिया। इसके बाद भीम ने इस कठिन व्रत को पूरा किया था। इस कारण से इस एकादशी को भीमसेन एकादशी, भीम एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
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