वतन लौटे समुद्री लुटेरों की कैद से छूटे युवक, भाई से गले मिल छलके आंसू
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नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों की कैद से छूटने के बाद हिमाचल के जिला कांगड़ा के तीनों युवक ग्रुप कैप्टन सुशील धीमान, अजय कुमार व पंकज कुमार सही सलामत दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। इनके स्वागत के लिए सुशील के भाई वहां पहले से ही मौजूद थे।
दोनों भाई जब एक दूसरे के गले मिले तो खुशी से आंखे भर आईं। सुशील के छोटे भाई विनय ने इसकी तस्वीर फेसबुक पर शेयर की। उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का धन्यवाद भी किया है।
सूत्रों से पता चला है कि एयरपोर्ट से उनको दिल्ली के हिमाचल भवन में ले जाया गया जहां पर उनको किसी भी मीडिया के अधिकारी से नहीं मिलने दिया गया। अब रविवार को वह नगरोटा सूरिया में पहुंच जाएंगे। घर में बेटे के स्वागत के लिए मां ने विशेष इंतजाम कर रखे हैं।
परिवार वालों से बात की तो छलके खुशी के आंसू
नाइजीरिया में सुमद्री लुटेरों के चंगुल से छूटने के बाद शनिवार को कांगड़ा जिले के तीनों युवकों की आखिरकार वतन वापसी हो गई। अपने अन्य दो साथियों के साथ दिल्ली पहुंचे अजय की परिवार वालों से पूरे एक महीने के बाद फोन पर बात हुई। इससे पहले अजय की 14 मार्च को अपने परिवार वालों से फोन पर बात हुई थी।
अजय की आवाज सुनकर परिवार वालों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अजय और उनके दोनों साथी रविवार को दिल्ली से हिमाचल अपने घर पहुंचेंगे। इससे परिवार वालों में खुशी का माहौल है।
अजय की माता कमला ने बताया कि बच्चों के बंधक बनाए जाने की बात पता लगते ही परिवार वालों ने रातें जाग-जाग कर काटी हैं कि कब क्या फोन आ जाए और क्या सुनेंगे। फोन की घंटी बजने पर ही उनको डर लगने लगता था।
समुद्री लुटेरों ने मांगी थी फिरौती
इसी बीच अजय के पिता को ब्रेन हैम्रेज का भी अटैक आया, जिससे परिवार और मुश्किल में फंस गया था, लेकिन अब वह ठीक हैं। बहन आशा का कहना है कि अजय की रिहाई के लिए उन्होंने हर समय मां चामुंडा के सामने ही पूजा-अर्चना की है।
उन्हें मां चामुंडा पर पूरा विश्वास था कि उनका भाई सकुशल देश लौटेगा। इसके लिए उन्होंने मां से मन्नत मांगी थी। इसे पूरा करने के लिए वह भाई और परिवार के साथ माता चामुंडा के मंदिर जाएंगे।
नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों ने नगरोटा सूरियां की पंचायत सुकनाड़ा के सुशील कुमार, पालमपुर के अजय कुमार और नगरोटा बगवां की उस्तेहड़ पंचायत के रड गांव के पंकज को बंधक बना लिया था।
तीनों मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। उन्हें छोड़ने की एवज में लुटेरों ने 11 मिलियन नायरा करेंसी के रूप में फिरौती मांगी थी। परिवार वालों से लुटेरों ने सेटेलाइट कॉल के जरिये फोन पर बात भी करवाई थी।