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शिमला में भी हुई थी नेताजी से जुड़े इस अहम मामले की जांच

Sun, 24 Jan 2016 10:02 AM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 10:02 AM IST
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Netaji Subhash Chandra bose case investigation at shimla.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के रहस्य की जांच शिमला में भी की गई थी। पिछली एनडीए सरकार ने ही यह जांच करवाई थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और फैजाबाद के गुमनामी बाबा की हैंडराइटिंग्स का शिमला की अंग्रेजों के जमाने की फोरेंसिक लैब सरकारी परीक्षक प्रश्नास्पद प्रलेख (जीईक्यूडी) में वर्ष 2002 में मिलान किया गया था।

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‘नेताजी डिसअपीयरेंस केस’ की जांच कर रहे मुखर्जी कमीशन ने इस मामले की फाइल फोरेंसिक जांच शिमला स्थित जीईक्यूडी को दी। वर्तमान में यह लैब सीएफएल चंडीगढ़ के अंतर्गत आती है।
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माना ये जा रहा था कि गुमनामी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस थे, लेकिन बाद में शिमला की इस लैब ने रिपोर्ट दी थी कि ये हैंडराइटिंग्स आपस में मेल नहीं खाती हैं। इसी रिपोर्ट के बाद मुखर्जी कमीशन ने माना कि ये गुमनाम बाबा सुभाष चंद्र बोस नहीं थे।
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शिमला में आज भी है नेताजी के तीन पत्र

Netaji Subhash Chandra bose case investigation at shimla.

लैब के सूत्रों ने बताया कि प्रयोगशाला में नेताजी और गुमनामी बाबा की हैंडराइटिंग्स को मिलाने पर पाया गया कि दोनों की लिखाई सरसरी तौर पर देखने में मेल खाती लगती हैं, मगर दोनों लिखावटों में भिन्नताएं थीं।

इस जांच के बाद जीईक्यूडी ने रिपोर्ट दी कि दोनों ही हैंडराइटिंग्स एक आदमी की नहीं है। यह जांच दोबारा कोलकाता स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला में भी करवाई गई और वहां से भी यही रिपोर्ट दी गई। इस जांच के लिए डायरियां और पत्र कोलकाता स्थित सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय से जुटाए गए।

नेताजी के तीन पत्र आज भी शिमला की इस प्रयोगशाला में सुरक्षित हैं। गुमनामी बाबा की शक्ल सुभाष चंद्र बोस से मिलती थी। ये बाबा नेपाल से उत्तर प्रदेश आए थे। ये 1983 में रामभवन फैजाबाद में रहने लगे।

उन्होंने 16 सितंबर 1985 को फैजाबाद में आखिरी सांस ली। इनका अंतिम संस्कार 18 दिसंबर 1985 को फैजाबाद में हुआ। हिमाचल सरकार के फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय के निदेशक अरुण शर्मा ने भी माना कि ये जांच शिमला में हुई थी।

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