डिप्रेशन के लिए रामबाण बना लेवेंडर फूल
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आधुनिकता, बदलते लाइफ स्टाइल और स्पर्धा की दौड़ ने समाज के समक्ष नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। समाज में सुविधाओं में बढ़ोतरी के साथ बीमारियों में भी इजाफा हुआ। दशकों पूर्व किसी को डिप्रेशन अथवा अपसाद होना बड़ी बात थी, अब यह समस्या आम बात में तब्दील हो गई है। हर कोई इस समस्या, रोग अथवा चुनौती से वाकिफ है।
बहरहाल, डिप्रेस्ड अथवा अपसाद के रोगियों के लिए अच्छी खबर है। इस रोग के उपचार के लिए लगातार लंबे समय तक दवाईयों के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट से अब बचा जा सकेगा। नवीनतम प्रयोगों में डिप्रेशन के लिए लवेंडर फूल रामवाण साबित हुआ है। लवेंडर तेल तीन से चार हजार रुपये प्रति लीटर बिकना शुरू हो गया है।
वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि डिप्रेशन यानी अपसाद के मरीजों पर लवेंडर का प्रयोग बेहद सफल रहा है। आज कल भाग दौड़ की जिंदगी में यह फूल किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस फूल से तैयार किए गए तेल की मालिश से अपसाद के मरीजों को काफी राहत मिली है। औषधीय गुणों से भरपूर लवेंडर की खेती को प्रमोट कर प्रदेश की उपरी क्षेत्रों के किसान बागवानों की तकदीर बदल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन क्षेत्रों की जलवायु इसकी खेती के उत्तम है।
बाजार में इस फूल का तेल तीन से चार हजार रूपये तक प्रति लीटर बिक रहा है। वैज्ञानिकों की राय लेकर प्रदेश के किसान बागवान इस की खेती से अच्छी आय कमा सकते है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमाचल को इसकी खेती के लिए मशहूर किया जाएगा। हिमालयन जैव संपदा के प्रौद्योगिकी संस्थान(आईएचवीटी) पालमपुर ने लवेएंडर की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।
मालिश से मिलती है राहत
संस्थान की पहल पर चंबा जिला के कई क्षेत्रों में लवेएंडर की खेती के काफी अच्छे परिणाम सामने आ चुके है। इसकी व्यवसायिक खेती में चंबा जिला के सलूणी और तिसा क्षेत्र के कई किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूर हुई है। आईएचवीटी ने सलूणी,जसूर गढ़,कुल्लू जिला के झीड़ी और लाहौल में इसका सयंत्र भी लगा कर रखे है। हिमालयन जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान लाहौल में इसी सप्ताह एक मिनी सयंत्र लगाया जा रहा है।
हिमालयन जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. अनिल सूद ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिक लाहौल स्पीति,चंबा, किन्नौर, कुल्लू और अन्य ठंडे क्षेत्रों में भी लवेएंडर की खेती को प्रमोट करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अवसाद के मरीजों पर लवेंडर से बने तेल का प्रयोग बेहद सफल रहा है।
इसकी मालिश से मरीजों को राहत मिली है। सूद के अनुसार अरोमा थैरेपी के माध्यम से तेल मालिश से सिर दर्द और अपसाद का उपचार करने में फायदा हुआ है। वहीं इस तेल से परफ्यूम, साबुन तथा अन्य कॉसमैटिक भी तैयार किया गया है।