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राष्ट्रीय खेल दिवस: वरुण बोले- हिमाचल में ही होता तो शायद कभी भारतीय हॉकी टीम से नहीं खेलता
Sun, 29 Aug 2021 11:21 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:21 AM IST
सार
भारतीय हॉकी टीम के सदस्य वरुण कुमार का कहना है कि बाहरी देशों की अपेक्षा खेल क्षेत्र में हिमाचल बहुत पीछे है। यहां खेलों और खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है। वरुण ने कहा कि कठिन परिश्रम ही सफलता की पहली सीढ़ी है। किसी भी खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए जी-जान लगानी पड़ती है।
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भारतीय हॉकी टीम के सदस्य वरुण कुमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ऐसा महसूस होता है कि अगर हिमाचल प्रदेश में ही होता तो शायद भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा नहीं बन पाता, क्योंकि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। यह बात टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर लौटी भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी वरुण कुमार ने कही। उनका कहना है कि बाहरी देशों की अपेक्षा खेल क्षेत्र में हिमाचल बहुत पीछे है। यहां खेलों और खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है।
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वरुण ने कहा कि कठिन परिश्रम ही सफलता की पहली सीढ़ी है। किसी भी खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए जी-जान लगानी पड़ती है। यदि कठिन परिश्रम नहीं करेंगे तो पूछेगा कौन। टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक और जेवलिंग थ्रो में कीर्तिमान बनाने वाले खिलाड़ियों को अब पूरा विश्व जानता है। किसी भी खिलाड़ी का हाथ पकड़कर उसे आगे नहीं लाया जाता है। कठिन परिश्रम से ही सफलता कदम चूमती है।
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वरुण के मुताबिक देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सरकार को खेल स्टेडियमों के साथ खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए प्रभावशाली प्रयास करने चाहिए। देश में अनुभवी कोचों का अभाव है। सरकार को चाहिए कि खेल स्टेडियम बनाकर शिक्षित, कुशल और अनुभवी कोचों की तैनाती की जाए। जिला चंबा में भी खेल अकादमी और कोचों का अभाव ही प्रतिभा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।
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कहा कि आज के युवा नशे की लत में फंसकर अपना जीवन बरबाद करने के साथ परिवारों का भी नाम डूबो रहे हैं। युवाओं को कड़ी मेहनत से खेल प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेकर आगे बढ़ना चाहिए।