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Shimla:ननखड़ी बाजार मामले में कब्जाधारियों को राहत, सेब के पेड़ों को काटने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

Tue, 22 Jul 2025 12:12 PM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 22 Jul 2025 12:12 PM IST
सार

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

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Nankhari market case: High court gives relief to occupiers, interim stay on forced eviction
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से फौरी तौर पर राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों पर जबरन बेदखली कर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगले आदेश तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर सह-वन मंडल अधिकारी यानी डीएफओ रामपुर की बेदखली के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

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इसके साथ ही एक आवेदन भी दायर किया गया है, जिसके तहत याचिकाकर्ताओं को विवादित भूमि से बेदखल करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। यह मामला हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के तहसील ननखड़ी के बाजार का है। याचिकाकर्ता 1970-80 के बाद से यहां पर अपनी दुकानें और ढारे चला रहे हैं। इनमें से कुछ तो इससे भी पहले के हैं, जो यहां पर दुकानों को चलाकर अपने परिवार का जीवनयापन कर रहे हैं। उधर, ठियोग के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। न्यायालय ने अंतरिम आदेश को पारित करते हुए मानवता दिखाई है। राज्य सरकार अपनी बात अदालत में रखने में नाकामयाब रही है। जिससे गरीब तबके पर मार पड़ रही है। 

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सेब के पेड़ों के कटान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची हिमाचल सरकार
वन भूमि पर अतिक्रमण वाले बगीचों में फलों से लदे सेब के पेड़ों के कटान के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने जा रही है। राज्य सरकार के महाधिवक्ता अनूप रतन सोमवार को नई दिल्ली पहुंच गए। उनके साथ विधि विशेषज्ञ भी गए हैं। महा हैं। महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा है कि फलों से लदे पेड़ों को न काटा जाए, क्योंकि ये हमारी संस्कृति के भी खिलाफ है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रतन ने कहा कि एसएलपी तैयार कर दी गई है। सरकार जिला शिमला के चैथला और कुमारसैन के सराहन गांवों में फलों से लदे सेब के पौधों को काटने के जारी आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गई है। अनूप रतन ने कहा कि वह अपील करेंगे कि  प्रदेश सरकार इन बगीचों को काटने के आदेश पर फिलहाल रोक लगाए। हाईकोर्ट के आदेश के तहत लोगों को बेघर भी होना पड़ रहा। प्रदेश में जिस तरह से बरसात चली हुई है, ऐसे में लोगों को घरों से भी बेदखल करना भी उपयुक्त नहीं है। 

 

काजल की याचिका खारिज हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा के विधायक पवन काजल की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें उन्होंने कांगड़ा के जिला न्यायाधीश की ओर से 22 अगस्त 2024 को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एक रिकवरी सूट में काजल के साक्ष्य बंद कर दिए गए थे। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने वादी की ओर से साक्ष्य पेश करने में की गई देरी पर कहा कि जिला न्यायालय ने वादी को साक्ष्य पेश करने के लिए पहले ही 15 से अधिक स्थगन प्रदान किए थे। इस स्तर पर याचिकाकर्ता को और रियायत दी जाती है तो यह वादी की चूक को प्रीमियम देने जैसा होगा। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि कई मामलों में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए किसी भी पक्ष को तीन से अधिक अवसर नहीं दिए जाने चाहिए। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। पवन काजल की ओर से उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया था कि याचिकाकर्ता को जिरह करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दो गवाहों की जांच की अनुमति भी मांगी थी, जिसके लिए उचित लागत का भुगतान करने की भी पेशकश की गई थी। 

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