अच्छी खबर! यहाँ बनाए जाएंगे शॉपिंग मॉल
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हिमाचल में पांच मल्टी स्टोरी पार्किंग और शॉपिंग मॉल बनेंगे। प्रदेश सरकार ने इसके निर्माण कार्य के लिए हरी झंडी दे दी है। ये मल्टी स्टोरी पार्किंग और शॉपिंग माल नाहन, सुंदरनगर, चुवाड़ी, डलहौजी और नूरपुर में बनेंगे। शहरी विकास विभाग के अधिकारी और चीफ सेक्रेटरी पी. मित्रा के साथ इस सिलसिले में विस्तृत चर्चा हुई है। इसमें सरकार ने शहरी विकास विभाग को योजना को सिरे चढ़ाने के लिए काम शुरू करने को कहा है।
शहरी विकास विभाग इस कार्य को अंजाम देगा। विभाग ने इसके लिए जमीन का चयन कर लिया है। इन मल्टी स्टोरी पार्किंग में साढ़े तीन सौ और चार सौ वाहन खड़े करने की क्षमता होगी। इसी तरह हर पार्किंग की बेसमेंट में शॉपिंग मॉल बनेंगे। निर्माण कार्य पीपीपी मोड पर होगा। प्रदेश में हर महीने सैकड़ों वाहन आते हैं लेकिन पार्किंग की कमी के चलते लोगों को वाहन खड़े करने को जगह नहीं मिलती। ऐसे में वाहन सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं।
प्रदेश सरकार पीपीपी मोड पर कराएगी निर्माण कार्य
देश सरकार पार्किंग के मामले को गंभीरता से ले रही है। शहरों में विकास कार्यों के साथ साथ पार्किंग को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। शहरी विकास विभाग की मानें तो ये योजना डेवलपमेंट प्लान का हिस्सा होगा।
प्रदेश सरकार के इस फैसले से हजारों लोगों को फायदा होगा। इससे सरकार को भी राजस्व मिलेगा। चीफ सेक्रेटरी पी. मित्रा ने योजना को अमलीजामा पहनाने को कहा है। सभी प्रोजेक्ट पीपीपी मोड़ पर होंगे। जल्द ही इसके लिए कंपनियों से आवेदन मांगे जाएंगे। सभी मल्टी स्टोरी पार्किंग होंगी।
- कैप्टन जेएम पठानिया, निदेशक शहरी एवं विकास विभाग
हिमुडा से प्लॉट फ्लैट खरीदने वालों को राहत क्यों नहीं?
आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने सरकार के टीसीपी संशोधित विधेयक पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एसोसिएशन ने शहरी विकास मंत्री और विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर पूछा है कि संशोधित विधेयक में सबको फायदा दिया जा रहा है तो हिमुडा से प्लॉट और फ्लैट खरीदने वालों को इससे क्यों वंचित किया जा रहा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव वर्मा ने कहा कि न्यू शिमला, विकासनगर, कसुम्पटी, फ्लावरडेल, संजौली, धर्मपुर, सोलन, धर्मशाला, नाहन, हमीरपुर, अंब, बिलासपुर में सैकड़ों लोगों ने हिमुडा से जमीन खरीदी है। लोगों के पास 90 से 120 स्कवेयर मीटर के प्लॉट हैं। ये प्लॉट हिमुडा ने ही बनाकर दिए हैं।
प्लॉट पर डंगे लगाए हैं और इनके पीछे मिट्टी भरी गई है। अब लोगों को पार्किंग की सुविधा मिल रही है तो इन लोगों को बेसमेंट खोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हिमुडा से खरीदे गए प्लॉट की साइट छोटी होती है। ऐसे में कंस्ट्रक्शन करने पर डेविएशन 10 फीसदी से बढ़ जाती है।
प्रदेश में ऐसे हजारों प्लॉट मालिक है जिन्होंने घर बनाते वक्त डेविएशन की है। छोटे प्लॉटों में नियमित तौर पर सेटबैक नहीं छोड़े जाते। अगर नियमों के मुताबिक सेटबैक छोड़ भी दिए जाएं तो घर नहीं बन सकता।