हिमाचल: 10 सेकंड में जमींदोज हुई चार मंजिला इमारत, 13 जवानों समेत 14 की मौत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के कुमारहट्टी में धराशायी हुए चार मंजिला भवन में असम राइफल के 13 जवानों और भवन मालकिन की मौत हो गई। भवन में दबे 42 लोगों में से 28 घायल अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
सोमवार को मलबे में दबे 12 सैनिकों के शव निकाले गए। करीब 24 घंटे बाद सेना और एनडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया है। बीते दिन दो शव बरामद हुए थे।
उधर, मुख्यमंत्री ने मौके का मुआयना कर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। ढाबा संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। मृतकों में अधिकतर जवान असम, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे।
डगशाई छावनी में तैनात 30 जवान रविवार को पिकनिक मनाने निकले थे। चाय-पान के लिए वे उस चार मंजिला इमारत के चल रहे ढाबे में रुके थे, जो धराशायी हो गई।
भवन की दूसरी मंजिल में थे ज्यादातर जवान
सोमवार को एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक-एक करके जवानों के शव मलबे से निकाले। चार शव पिलर और लैंटर के नीचे एक ही जगह से बरामद हुए। एक सैनिक का शव बुरी तरह कुचली हालत में मिला है।
एमएमयू अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद सेना ने शवों को अपने कब्जे में ले लिया। सेना की बस काफी देर पहले ढाबे के सामने आकर रुकी थी। जवान ढाबे की पहली और दूसरी मंजिल में मौजूद थे। वे खाने का लुत्फ उठा रहे थे।
अचानक से चार मंजिला भवन पहले आगे की ओर झुका और बहुत ही तेजी के साथ पीछे की तरफ गिर गया। सबसे पहले ढाबे की रसोईघर में मौजूद कर्मचारी बाहर की ओर भागे।
यह रसोईघर सड़क से सटा हुआ था। इस दौरान ऊपरी मंजिल और छिटक कर बाहर गिरे लोग अपनी जान बचा पाए। दूसरी मंजिल के सभी जवान मलबे में दब गए।
एसडीएम सोलन करेंगे जांच 15 दिन में देंगे रिपोर्ट
मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि एसडीएम सोलन हादसे की जांच करेंगे और आगामी 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेंगे। हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
उन्होंने एमएमयू और धर्मपुर अस्पताल में पहुंचकर घायलों का हाल भी जाना और एनडीआरएफ, राज्य पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे संयुक्त अभियान की जानकारी ली।
उन्होंने प्रशासन को एनडीआरएफ को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। राहत कार्यों में एनडीआरएफ की तीन अतिरिक्त कंपनियां घटनास्थल पर भेजी हैं। सरकार ने सुन्नी से आधुनिक उपकरणों के साथ एनडीआरएफ के दल को लाने के लिए हेलीकाप्टर उपलब्ध करवाया है।
मोबाइल की घंटी ने दोबारा शुरू करवाया रेस्क्यू ऑपरेशन
सेना के आखिरी जवान का शव बरामद होने के बाद जैसे ही रेस्क्यू अभियान को खत्म करने की तैयारी चल रही थी, अचानक मलबे के ढेर से मोबाइल की घंटी बज उठी। इसे सुनकर एनडीआरएफ जवान फिर खोजबीन में जुट गए।
कुछ देर बाद मलबे में जवान का एक मोबाइल बरामद हुआ। इस पर अलार्म बज रहा था। हालांकि, मोबाइल लॉक होने की वजह से मोबाइल के मालिक की जानकारी नहीं मिल पाई। इसके बाद एक और मोबाइल बरामद हुआ। यह टूट चुका था।