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शिमला पुलिस की दबंगई, नहीं मानती कानून

Wed, 13 Aug 2014 12:36 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 13 Aug 2014 12:36 PM IST
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More Shimla police mess, doing it yourself occupation

दूसरों को नियम और कानून का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस खुद ही कब्जे करने लगे तो कोई क्या करे। माल रोड के कोर एरिया में शिल्ली चौक पर पुलिस ने अवैध निर्माण कर दिया है।

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प्रतिबंधित रोड पर वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखने के लिए पुलिस ने नगर निगम की अनुमति के बिना पुलिस गुमटी का साइज बढ़ा दिया है।
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रातों-रात यह निर्माण नहीं हुआ है। एक सप्ताह के दौरान पुलिस ने इस कारनामे को अंजाम दिया है। कोर एरिया में सरेआम हुए इस अवैध निर्माण को लेकर अब नगर निगम के अधिकारियों के होंठ भी सिल गए हैं।
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पुलिस पर कार्रवाई करना तो दूर नगर निगम का कोई भी अधिकारी इस मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। आम आदमी को अवैध निर्माण पर नसीहतें देने वाले नगर निगम की कार्यप्रणाली भी इस मामले को लेकर संदेह के घेरे में है।

बिना परमिट शहर के प्रतिबंधित और बंधित मार्गों पर दौड़ने वाली गाड़ियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का पुलिस का फैसला सराहनीय है।

लाजमी है कि कैमरों की रिकॉर्डिंग देखने के लिए कंप्यूटर सेटअप भी लगाना पड़ेगा। रात के समय भी पुलिस कर्मी को गुमटी में ड्यूटी देनी पड़ेगी।

इसके लिए पुलिस गुमटी का साइज बढ़ाना भी समझ में आता है लेकिन बिना अनुमति निर्माण करना समझ से परे है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस के लिए नगर निगम के बनाए गए नियम-कानून कोई मायने नहीं रखते?


शहर में अवैध निर्माण होने पर एमसी लोगों को नोटिस जारी करता है। निगम आयुक्त के कोर्ट में मामला चलाया जाता है। नगर निगम के नियमों में हुए संशोधन में तो अवैध निर्माण के दोषी व्यक्ति को तीन माह तक की कैद हो सकती है। इसके अलावा जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है।


जुर्माना दस हजार रुपये से रोजाना एक हजार रुपये तय किया है। अगर कोई व्यक्ति निगम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अवैध निर्माण को नहीं तोड़ेगा तो दस हजार रुपये जुर्माना, तीन माह की कैद होगी।

नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने कहा है कि शिल्ली चौक में गुमटी को बड़ा करने की जानकारी उनके ध्यान में नहीं है। पुलिस अधीक्षक से इस बाबत बात करेंगे।

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