पहाड़ों की उत्पादन क्षमता घटी, बंदर खेती के लिए खतरा
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पहाड़ों की कृषि और बागवानी संबंधी उत्पादन क्षमता घटती जा रही है। इसके अलावा बंदर भी खेती के लिए खतरा बन चुके हैं। बंदरों के आतंक के चलते कई इलाकों में किसानों-बागवानों ने खेतीबाड़ी करना तक छोड़ दिया। ये बातें शूलिनी विश्वविद्यालय सोलन में हिमालय से जुड़े लगभग एक दर्जन राज्यों के सतत पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन के तीन दिवसीय सातवें संस्करण के शुभारंभ पर सामने आई हैं। आईपीएच एवं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।
बागवानी मंत्री महेंद्र ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में उत्पादन की क्षमता कम होती जा रही है। हिमाचल में सेब का उत्पादन 4.5 करोड़ बॉक्स से गिरकर 1.5 करोड़ बॉक्स रह गया है। उत्पादकता में सुधार के लिए नए प्रयोग करने और विचारों की आवश्यकता है। किसान और बागवान बंदरों के आतंक का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों से इसके सुधार के लिए सुझाव भी मांगे गए हैं। सम्मेलन में आए सुझाव और सिफारिशें शिमला में होने वाले मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में रखी जाएंगी।
हिंदू-कुश हिमालय वैश्विक संपत्ति
आईसीआईएमओडी नेपाल के उपमहानिदेशक एकलव्य शर्मा ने कहा कि हिंदू-कुश हिमालय वैश्विक संपत्ति है जिसमें कुल 36 वैश्विक जैव विविधता बिंदू हैं। हिमालयी जैव विविधता को बनाए रखने के लिए अनुकूलता के प्रति संवेदनशीलता के परिप्रेक्ष्य से आगे बढ़ने की जरूरत है। भारतीय हिमालय जलवायु अनुकूलन कार्यक्रम के प्रोजेक्ट लीडर व स्विस डेवलपमेंट कारपोरेशन स्विट्जरलैंड के मुस्तफा खान ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों की विविधता सबसे बड़ी ताकत है।
मुख्यमंत्री, मंत्रियों का सम्मेलन पीटरहॉफ शिमला में आज
पर्यावरण से कृषि पर बदलाव, जलविद्युत परियोजनाओं और पर्यटन से विकास की संभावनाओं जैसे विषयों पर शुक्रवार को शिमला में दस राज्य आपस में मंथन करने जा रहे हैं। इसके लिए हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों का राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में सम्मेलन होने जा रहा है।