शिमला में बंदरों की गैंग से सावधान, पलभर में झपट लेते हैं सामान
शिमला शहर में बंदर खूब उत्पात रहे हैं। सैलानियों और आम जनता का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। माल रोड पर सैलानी जैसे ही खाने-पीने का सामान खरीद रहे हैं, बंदर तुरंत आकर उनसे ये चीजें छीन ले जाते हैं। उधर, वन विभाग ने बंदरों को भगाने के लिए शहर में दस मंकी वॉचर तो तैनात कर रखे हैं, लेकिन ये कहीं दिखाई नहीं दे रहे।
मंदिरों से लेकर बाजारों तक में बंदरों का आतंक जारी है। लोगों का कहना है कि इन कर्मचारियों को ऐसी जगहों पर तैनात किया जाए, जहां बंदरों का उत्पात सबसे ज्यादा है। शहर में इस समय सीटीओ चौक, रिज मैदान, रिट्ज, मेट्रोपोल, यूएस क्लब समेत जाखू एरिया में बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा है।
इन्हीं इलाकों में दिन के समय सबसे ज्यादा भीड़भाड़ रहती है। लेकिन मंकी वॉचर इन जगहों से गायब है। उधर, अब वन विभाग बंदर भी नहीं पकड़ रहा। विभाग का कहना है कि शहर में अब ऐसे बंदर बहुत कम बचे हैं, जिनकी नसबंदी होनी है। जिन बंदरों की नसबंदी हो चुकी है, उन्हें नहीं पकड़ा जाएगा।
बंदर वर्मिन, हमला करने पर मार सकते हैं लोग
वन विभाग का कहना है कि शिमला शहर में बंदर वर्मिन घोषित किए गए हैं। लेकिन लोग इन्हें नहीं मार रहे। नियमानुसार विभाग खुद बंदरों को न मार सकता और न ही इन्हें पकड़कर रख सकता है। सिर्फ उन्हीं बंदरों को पकड़ा जाता है जो लगातार लोगों पर हमला कर रहे हों।
विभाग का कहना है कि लोग चाहें तो इन बंदरों को मार सकते हैं। उधर, ज्यादातर लोगों के पास बंदरों को मारने के लिए न तो बंदूकें हैं और न ही दूसरा साधन। ऐसे में बंदर मारने की छूट से भी जनता को राहत मिलती नहीं दिख रही।
शहर में बंदर भगाने के लिए मंकी वाचर तैनात किए गए हैं। लेकिन ये अलग-अलग जगहों पर मौजूद रहते हैं। शिकायत मिलने के बाद बंदर भी पकड़े जा रहे हैं। - राजेश शर्मा, डीएफओ वन्य जीव विभाग