Himachal Politics: सीएम के गृह जिले में त्रिलोक, रणधीर ने मनवाया लोहा, हमीरपुर सीट भाजपा की झोली में डाली
विधायक त्रिलोक जमवाल व विधायक रणधीर शर्मा चुनाव प्रबंधन में एक बार फिर अपने रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाने में सफल रहे हैं। सीनियर होने की वजह से भाजपा ने हमीरपुर में नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा को प्रभारी और त्रिलोक जमवाल को सह प्रभारी बनाया था।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के पुराने गृह विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर सदर का नेतृत्व कर रहे विधायक त्रिलोक जमवाल चुनाव प्रबंधन में एक बार फिर अपने रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाने में सफल रहे हैं। पहले बड़सर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी इंद्रदत्त लखनपाल की जीत सुनिश्चित की। वहीं, अब हमीरपुर उपचुनाव में भी बाजी भाजपा के आशीष शर्मा के हाथ लगी है। इस उपचुनाव में रणधीर शर्मा और त्रिलोक जमवाल की जोड़ी की अचूक चुनावी रणनीति के आगे कांग्रेस सरकार के केबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी का चुनाव प्रबंधन एक बार फिर से बौना साबित हो गया।
बिलासपुर सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल भाजपा में संगठनात्मक कार्यों का अच्छा-खासा अनुभव रखने के साथ ही चुनाव प्रबंधन में भी माहिर हैं। लोकसभा चुनाव के साथ हिमाचल में विधानसभा की छह सीटों पर हुए उपचुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर के तहत बड़सर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था। कांग्रेस ने यह जिम्मा केबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी को सौंपा था। धर्माणी के पास अधिक अनुभव होने के साथ ही सरकार की ताकत भी थी, लेकिन इसके बावजूद त्रिलोक जमवाल बेहतर चुनाव प्रबंधन के दम पर भाजपा प्रत्याशी इंद्रदत्त लखनपाल को विजयी बनाने में सफल रहे थे। इस बार मुख्यमंत्री के गृह जिले की ही हमीरपुर सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा विजयी रहे हैं।
सीनियर होने की वजह से भाजपा ने हमीरपुर में नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा को प्रभारी और त्रिलोक जमवाल को सह प्रभारी बनाया था। बताते चलें कि त्रिलोक जमवाल संगठनात्मक कार्यों के साथ चुनाव प्रबंधन में अपने कौशल का प्रमाण समय-समय पर देते आए हैं। उन्हें जो भी दायित्व सौंपा गया, उसे अग्निपरीक्षा समझकर उन्होंने पार्टी हाईकमान की उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिछले साल राजस्थान जैसे बड़े प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में हिमाचल के पहली बार के विधायक होने के बावजूद उन्हें 17 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रणनीति बनाने का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था। इनमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चुनाव क्षेत्र भी शामिल थे। उन 17 में से 14 सीटों पर भाजपा की जीत का परचम लहराने से त्रिलोक जमवाल पार्टी हाईकमान की कसौटी पर खरा उतरने में सफल रहे थे।