हिमाचल में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का मिलाजुला असर, बारिश-बर्फबारी के बीच प्रदर्शन
हिमाचल में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का बुधवार को प्रदेश में मिलाजुला असर रहा। व्यावसायिक वाहन ऑपरेटरों समेत आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मियों ने कामकाज पूरी तरह ठप रखा। हालांकि, निजी बस ऑपरेटर हड़ताल में शामिल नहीं हुए। एलआईसी, बैंक, पोस्टल और एजी ऑफिस में भी कामकाज प्रभावित रहा। राजधानी शिमला में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के बीच यूनियनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला।
सीटू, इंटक, एटक सहित देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व बीएसएनएल, एलआईसी, बैंक, पोस्टल, एजी ऑफिस, केंद्रीय कर्मचारियों की यूनियनों, रोड ट्रांसपोर्ट, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, एचपीएसईबी, बिजली मजदूर, मनरेगा, निर्माण व सार्वजनिक क्षेत्र के मजदूरों की दर्जनों फेडरेशनों के संयुक्त मंच द्वारा किए आह्वान पर प्रदेश के कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किए।
बीएसएनएल, बैंक, पोस्टल, बीमा व अन्य केंद्रीय कर्मचारियों के संस्थानों तथा बिजली बोर्ड मुख्यालय में गेट मीटिंग की गईं। शिमला शहर में सैकड़ों मजदूर सुबह ग्यारह बजे भारी बर्फबारी के बीच पंचायत भवन पहुंचे। यहीं पर मजदूरों ने जनसभा की जिसे सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, माकपा विधायक राकेश सिंघा, जिला उपाध्यक्ष किशोरी ढटवालिया और सचिव बाबू राम ने संबोधित किया।
ये हैं मांगें
- मजदूरों को 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन मिले
- आउटसोर्स व ठेका मजदूरों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक समान काम के लिए समान वेतन मिले
- आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा जैसी स्कीम वर्करों को नियमित किया जाए
- मोटर व्हीकल एक्ट में ट्रांसपोर्टर विरोधी संशोधन वापस लिए जाएं
- मनरेगा और निर्माण मजदूरों के कल्याण बोर्ड को मजबूत किया जाए
- आउटसोर्स के लिए ठोस नीति बनाई जाए
- ठेका प्रथा व फिक्सड टर्म रोजगार पर रोक लगाई जाए तथा नियमित रोजगार दिया जाए
- वर्ष 2003 के बाद लगे कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल की जाए
- स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट सख्ती से लागू किया जाए
- देश के 44 श्रम कानूनों में संशोधन करके उन्हें केवल चार श्रम संहिताओं में बदलने व श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी व पूंजीपति परस्त परिवर्तनों की मुहिम बंद हो