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कारगिल शहीद की प्रतिमा का तिरस्कार, परिजनों में भारी रोष

Mon, 06 Mar 2017 12:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
ब्यूरो/अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन) Updated Mon, 06 Mar 2017 12:19 PM IST
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Miscreants vandalised statue of martyr Tara Chand in Solan Himachal Pradesh

जेएंडके बारामूला में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए हिमाचल के जिला सोलन की खेड़ा पंचायत के सूबेदार तारा चंद के शहीदी दिवस पर उनकी प्रतिमा का तिरस्कार किया गया है। मातृभूमि के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीद सूबेदार की प्रतिमा को शरारती तत्वों ने रात के अंधेरे में तोड़ कर नुकसान पहुंचाया है। 

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इस घटना से परिजनों और क्षेत्रवासियों में भारी रोष है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। खेड़ा में राष्ट्रीय उच्च मार्ग 105 पर शहीद की प्रतिमा स्थापित है। 4 मार्च को उनके शहीदी दिवस के दिन ही शरारती तत्वों ने तोड़फोड़ की है।

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शरारती तत्वों ने रात के अंधेरे में प्रतिमा को तोड़कर पहुंचाया नुकसान

Miscreants vandalised statue of martyr Tara Chand in Solan Himachal Pradesh

परिजनों और लोगों की ओर से पुलिस शिकायत में कहा गया है कि हर साल शहीदी दिवस के दिन शहीद की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी जाती है। जैसे ही उनके परिजन प्रतिमा के पास श्रद्धांजलि देने गए तो देखा कि प्रतिमा से छेड़छाड़ हुई है। शहीद परिवार के पीछे उनकी पत्नी रोशनी देवी और बेटे नरेंद्र कुमार, रिंकू, अनिल कुमार और मनदीप सिंह हैं। 

शहीद तारा चंद के बेटे नरेंद्र कुमार ने सरकार से मांग की है शरारती तत्वों को खोजकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। डीएसपी साहिल अरोड़ा ने कहा कि शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शरारती तत्वों को ढूंढने में पुलिस लगी है। शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ तोड़फोड़ का मामला दर्ज किया है।

बारामूला में हुए थे शहीद

Miscreants vandalised statue of martyr Tara Chand in Solan Himachal Pradesh

नरेंद्र कुमार के अनुसार कारगिल युद्ध के बाद तनावपूर्ण माहौल के दौरान उनके पिता तारा चंद की पोस्टिंग बारामूला में थी। 4 मार्च 2001 को ड्यूटी के दौरान कुछ आतंकियों ने उनके ट्रूप पर हमला बोल दिया। इस दौरान तारा चंद को गोली लगी और वह शहीद हो गए।

परिजनों को यह भी मलाल
परिजनों को मलाल है कि शहीद के परिवार से किए गए कुछ वायदे पूरे नहीं हो सके हैं। 16 साल बीत जाने पर आज तक परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नौकरी और अन्य सहायता नहीं मिली है। 

हालांकि, सरकार ने शहीद तारा चंद के नाम पर ग्राम पंचायत खेड़ा में स्कूल का नामकरण किया है, जिसे अपग्रेड भी कर दिया है। लेकिन शहीद के परिवार की कोई विशेष मदद नहीं की है।

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