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संस्मरण: जेल से भाग अयोध्या पहुंच गए थे नगरोटा के कारसेवक
Mon, 15 Jan 2024 10:59 AM IST
Krishan Singh
अनिल भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)
अनिल भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 15 Jan 2024 10:59 AM IST
सार
कारसेवकों के दल के प्रमुख सदस्य बलराम पुरी ने बताया कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर यहां के लोगों में भी एक जुनून था। जेल से भागकर उनका दल अयोध्या जा पहुंचा था।
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नगरोटा के कारसेवक(फाइल)
- फोटो : संवाद
विस्तार
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण को किए गए संघर्ष में हिमाचल प्रदेश के नगरोटा बगवां क्षेत्र के कारसेवकों का भी अहम योगदान रहा है। यहां के लगभग 13 कारसेवकों ने भी जान जोखिम में डालकर इस महायज्ञ में अपनी आहुति डाली थी। कारसेवकों के दल के प्रमुख सदस्य बलराम पुरी ने बताया कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर यहां के लोगों में भी एक जुनून था। जेल से भागकर उनका दल अयोध्या जा पहुंचा था। वह बताते हैं कि नगरोटा बगवां क्षेत्र से लगभग 13 लोगों के एक दल को स्थानीय निवासियों ने बैंड बाजों के साथ वाया पठानकोट अयोध्या के लिए रवाना किया था।
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दल में ओम प्रकाश खोसला, दीवान चंद, केदारनाथ बंटा, पूजन भंडारी, महंत ओमप्रकाश गिरी, रामचंद मेहता, केदारनाथ शास्त्री, देशराज डोगरा, आज्ञाराम गुप्ता, के. महंत राम, मास्टर बिशन दास और रामपाल शर्मा शामिल थे। अयोध्या जाने पर प्रतिबंध था। इसलिए उनके दल को हरदोई में उतार दिया गया। कारसेवकों को जगह-जगह स्टेशनों पर उतार लिया जाता था, लेकिन हम लोग किसी तरह हरदोई पहुंचने में सफल हो गए। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार करके सितारगढ़ जेल में रखा गया। लेकिन अयोध्या पहुंचने के जुनून के चलते रात को जेल भवन की दीवार के साथ के एक पेड़ पर चढ़कर दल वहां से भाग निकला। लगभग 65-70 किलोमीटर पैदल चलकर आखिर सरयू नदी के किनारे पहुंचे। पैदल सफर के दौरान रास्ते में उन्हें लोगों ने पैकेटों में खाना दिया। संवाद
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प्रशासन ने किश्तियों को कर दिया था उल्टा
सरयू नदी के तट पर अलग मंजर था, घाटों की सारी किश्तियों को प्रशासन ने उल्टा कर दिया था और मल्लाहों को नजरबंद कर। स्थानीय लोगों की सहायता से किश्तियों को सीधा करके कारसेवकों ने सरयू पार की और अयोध्या पहुंच गए। इस दौरान सरयू के ऊपर बने पुल पर गोलियां चलीं और उसमें 5-6 लोग शहीद हो गए। कई लोगों ने पुल के ऊपर से नदी में छलांग लगा दी। आंसू गैस और पुलिस के लाठीचार्ज से अफरातफरी मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल की अगुवाई में कार सेवकों ने विवादित ढांचे के गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा दिया। उसके बाद स्थिति सामान्य हो जाने पर वह लोग नगरोटा बगवां वापस आए।
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