मेधावी छात्र सम्मान समारोह: सम्मान पाने के लिए पैदल चले, 14 घंटे बस में सफर कर शिमला पहुंचे मेधावी
10वीं टॉपर मारिशा ने बताया कि मैं मम्मी के साथ शिमला आई हूं। हमारे इलाके में कई जगह सड़कें टूटी हुई हैं। शिमला आने के लिए वीरवार दोपहर 2:00 बजे हमने घर से पंडोह तक बस ली। इसके आगे दो बार टैक्सी बदलनी पड़ी।
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मैं सीएम के हाथों मेडल लेना चाहती थी। पापा दर्जी हैं। मैंने ही उन्हें शिमला आने के लिए तैयार किया। वीरवार सुबह 10:45 बजे पापा के साथ अपने गांव धारपड़ा से 6 किमी पैदल चलकर चंबा पहुंचीं। वहां से शिमला के लिए बस ली। 14 घंटे के सफर के बाद सुबह 4:00 बजे शिमला पहुंचे। यह कहना था नेहा कुमारी का। वह चंबा की रहने वाली हैं और 12वीं की टॉपर हैं। मौका था अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह का।
दरअसल मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हाथों मेडल पहनने के लिए 10वीं और 12वीं के कई टॉपर एक दिन पहले वीरवार को ही घर से शिमला के लिए रवाना हो गए थे। आपदा के चलते कई जगह सड़कें बंद थीं। ऐसे में कुछ टॉपर मम्मी-पापा के साथ कई किलोमीटर पैदल चले, कई बसें और टैक्सियां बदलीं। लेकिन सभी शुक्रवार सुबह शिमला पहुंच गए। सुबह चेहरे पर जो थकान थी, वह मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर दूर हो गई। अभिभावक भी लाडलों को सम्मानित होता देखकर फूले नहीं समा रहे थे।
बेटी चंडीगढ़, मां आनी से पहुंची शिमला, लिया सम्मान
12वीं के बाद मैं अब चंडीगढ़ से बीए आनर्स की पढ़ाई कर रही हूं। मैं दीदी के साथ सुबह 6:00 बजे चंडीगढ़ से शिमला रवाना हुई थी। मुझे मेडल पहनते देखने के लिए मम्मी भी आनी से शिमला आई हैं। मुख्यमंत्री से मेडल पाकर खुश हूं। मैंने उनके साथ फोटो भी ली है।-बबीता ठाकुर, 12वीं टॉपर, निवासी आनी कुल्लू
सड़कें बंद, दो बार ली टैक्सी, फिर बस
मैं मम्मी के साथ शिमला आई हूं। हमारे इलाके में कई जगह सड़कें टूटी हुई हैं। शिमला आने के लिए वीरवार दोपहर 2:00 बजे हमने घर से पंडोह तक बस ली। इसके आगे दो बार टैक्सी बदलनी पड़ी। कई जगह पैदल भी चले। मैंने डीएवी पब्लिक स्कूल रांगरी मनाली से दसवीं की पढ़ाई की है। -मारिशा शर्मा, 10वीं टॉपर, निवासी सरकाघाट मंडी
मेडल मिला और पहली बार शिमला भी देखा
मैं पहली बार शिमला आई हूं। यहां मुझे मेडल भी मिल गया और शिमला भी देखने को मिला। समारोह में टाइम से पहुंच जाएं, इसके लिए रात को ही पापा के साथ घर से निकल गई। रात 12:00 बजे चंबा से शिमला के लिए बस ली थी। तड़के ही हम शिमला पहुंच गए। रात को पहली बार इतना लंबा सफर किया है। -मनीषा कुमारी, 12वीं टॉपर, निवासी चुराह चंबा
रात को ही पहुंच गए शिमला
पापा प्राइवेट नौकरी करते हैं और आज छुट्टी ली है। मेरा घर बद्रीपुर में है जो पांवटा से तीन किलोमीटर दूर है। इतने बड़े कार्यक्रम में देर न हो, इसलिए हम वीरवार रात 10:00 बजे ही शिमला पहुंच गए थे। यहां विक्ट्री टनल के पास किराये का कमरा लिया था। सीएम से मेडल पहनकर खुश हूं।-मेघा डिमरी, 12वीं टॉपर, निवासी पांवटा साहिब, सिरमौर