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आईजीएमसी पर भारी पड़ीं ये 6 खामियां
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 05 Jun 2014 11:57 PM IST
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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने छह बिंदुओं पर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की बढ़ी सीटों को रिन्यू करने से इनकार किया है। कॉलेज में एमबीबीएस का 100 सीटों का बैच चल रहा है।
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चार साल पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद एमबीबीएस की 65 से 100 सीटें की गई। सीटें बढ़ने के बाद एमबीबीएस का यह पांचवां बैच चल रहा है। एमसीआई ने अपनी साइट पर आईजीएमसी में निरीक्षण के दौरान पाई गई खामियों को सार्वजनिक किया है। हालांकि राज्य सरकार अब तक यही ढोल पीट रही है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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अमर उजाला ने सबसे पहले तीन मई के अंक में एमबीबीएस की सीटों को रिन्यू न करने का खुलासा किया था। एमसीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से आईजीएमसी में 65 से 100 की गई सीटों को रिन्यू न करने की सिफारिश की है।
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इस कॉलेज में 100 सीटों का पांचवां एमबीबीएस बैच चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगर एमसीआई की सिफारिश मंजूर कर दी तो अगले शैक्षणिक सत्र से 65 सीटों पर ही दाखिला होगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने 11 और 12 अप्रैल को आईजीएमसी का निरीक्षण किया था।
इन पर उठाए सवाल
- 250 छात्रों की बैठने की क्षमता वाला लेक्चरर थियेटर नहीं है।
- साल 2012, 2013 और 2014 से सेंट्रल लाइब्रेरी अपडेट नहीं है।
- इंटर्न हास्टल में 28 छात्रों के रहने की सुविधा है जबकि जरूरत 100 की है।
- 12 आपरेशन थियेटर में 19 टेबल हैं जबकि हर ओटी में एक से अधिक टेबल की जरूरत है। इंफ्यूजन पंप और सिरिंज पंप की भी कमी है।
- एनाटॉमी महकमे में कूलिंग चैंबर की सुविधा नहीं है। एक डिमोनस्टेशन रूम पैथालॉजी के साथ शेयर किया जा रहा है।
- आरएचटीसी और यूएचसी में डीन के पास केवल टीचिंग और ट्रेनिंग कंट्रोल है जो नियमों को पूरा नहीं करता है।
क्या कहता है कालेज प्रबंधन
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि उन्हें अभी लिखित में इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। अगर कुछ खामियां रह गई हैं तो उसे दूर किया जाएगा।
एमसीआई की शर्तों को करें पूरा : एससीए
आईजीएमसी केंद्रीय छात्र संघ के अध्यक्ष अभय मिन्हास ने कहा एमसीआई की शर्तों के मुताबिक कॉलेज में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। ऐसा न होने पर हमेशा सीटों को घटाने की सिफारिशें होती रहेंगी।