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एमसी शिमला बैठक: होटलों और कारोबारियों को टैक्स से राहत, गारबेज शुल्क भी घटेगा, पढ़ें बड़े फैसले

Mon, 28 Sep 2020 09:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 28 Sep 2020 09:10 PM IST
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MC Shimla house decisions: Tax relief to hotels and businesses, garbage charges will also be reduced, read big decisions
शिमला नगर निगम की मासिक बैठक। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना के चलते परेशानियां झेल रहे राजधानी के हजारों दुकानदारों और होटल कारोबारियों को नगर निगम सदन ने बड़ी राहत दी है। कोरोना के दौरान बंद रहे होटलों का दो तिहाई प्रापर्टी टैक्स माफ कर दिया है। कूड़ा शुल्क भी कम करने का फैसला लिया है। इनके अलावा लीज पर दी दुकानों समेत नगर निगम की सभी संपत्तियों से भी इस साल प्रॉपर्टी टैक्स न लेने का फैसला लिया है। सोमवार को उपमहापौर शैलेंद्र चौहान की अध्यक्षता में हुई नगर निगम की मासिक बैठक में राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शामिल हुए। राजधानी में तीन सौ से अधिक होटलों को इस साल 66 फीसदी तक टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। होटल कारोबारियों ने नगर निगम प्रशासन से राहत की मांग की थी। फरवरी से लेकर अब तक इनका कारोबार कोरोना के कारण चौपट पड़ा है। ऐसे में टैक्स से राहत दी जाए। गारबेज शुल्क को भी न्यूनतम किया जाए। सदन ने फैसला लिया कि एमसी एक्ट 127 के अनुसार होटलों का दो तिहाई टैक्स माफ किया जाएगा। इनका कूड़ा शुल्क भी न्यूनतम किया जाएगा। यानि इनसे घरेलू उपभोक्ता के बराबर 88 रुपये मासिक शुल्क लिया जाएगा।  शहर में लीज पर दी नगर निगम की 1100 से अधिक संपत्तियों से इस साल प्रापर्टी टैक्स नहीं लिया जाएगा। इनमें 987 दुकानें भी शामिल हैं जिनसे टैक्स नहीं वसूला जाएगा। नगर निगम पहली बार इन संपत्तियों से टैक्स लेने की तैयारी कर रहा था। लेकिन कोरोना काल और पार्षदों के विरोध के चलते यह फैसला फिलहाल टाल दिया है। अगले साल से यह टैक्स लागू करने पर आगामी बैठकों में फैसला लिया जाएगा।

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बंद रही सैकड़ों दुकानों, संस्थानों को कूड़ा शुल्क में मिलेगी राहत
 कोरोना के दौरान बंद रही सैकड़ों दुकानों और दूसरे संस्थानों को कूड़ा शुल्क में रियायत दी जाएगी। नगर निगम इसके लिए राजी हो गया है। मेयर की अध्यक्षता में सब कमेटी गठित की है जिसमें पार्षद और शिमला व्यापार मंडल के सदस्य शामिल होंगे। यह कमेटी तय करेगी कि किन-किन दुकानों को कूड़ा शुल्क में कितनी राहत दी जा सकती है। सदन में पार्षद इंद्रजीत सिंह और संजीव ठाकुर ने मामला उठाया कि कारोबारियों का कूड़ा शुल्क माफ किया जाए। निगम प्रशासन ने कहा कि आवश्यक सामान की ज्यादातर दुकानें खुली थी जिनसे कूड़ा उठाया है। इनका शुल्क माफ नहीं कर सकते, जो बंद थी, उन्हें राहत दे सकते हैं। सदन में पार्षद किरण बावा ने शहर के स्कूलों के बंद होने का मामला भी उठाया। कहा कि जब स्कूल बंद थे तो इन्हें भी राहत मिलनी चाहिए। प्रशासन ने कहा कि इन्हें भी राहत दी जाएगी। अब कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्पेशल हाउस होगा जिसमें राहत देने पर फैसला लिया जाएगा।
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गारबेज शुल्क के आनलाइन भुगतान पर अब मिलेगी 15 फीसदी की छूट
शहर में यदि कोई उपभोक्ता पूरे साल का कूड़ा शुल्क एकसाथ ऑनलाइन जमा करवाता है तो उसे 15 फीसदी तक की छूट दी जाएगी। सदन में इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। अब तक नगर निगम दस फीसदी की छूट दे रहा था। अब पूरे साल का एकमुश्त भुगतान पर दस फीसदी जबकि आनलाइन भुगतान पर पांच फीसदी की छूट दी जाएगी। कोरोना संक्रमण के चलते कैश काउंटर पर लगने वाली भीड़ को कम करने और आनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। शहर में 50 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं जिनके घर से कूड़ा उठता है। सदन ने 31 अक्तूबर तक टैक्स के बिल जमा करने पर दस फीसदी की छूट जारी रखने का भी फैसला लिया। इसके अलावा जिन लोगों को कोरोना के चलते पुराने गारबेज बिल नहीं मिले हैं, उन्हें पुराने बिलों के भुगतान पर अब पैनल्टी नहीं लगाई जाएगी। पार्षद दिवाकर देव शर्मा की मांग पर फैसला लिया गया कि वार्डों में भी महीने के एक दिन कूड़ा बिल जमा करने के लिए कैश काउंटर खोला जाएगा। कोरोना काल के दौरान का कूड़ा, बिजली बिल और टैक्स माफी के लिए सरकार को फिर रिमाइंडर भेजा जाएगा। इसके अलावा लोगों के घर छह महीने से बंद है, उन्हें अब सुपरवाइजर की रिपोर्ट पर कूड़ा शुल्क में राहत दी जाएगी। पार्षद आरती चौहान ने कारोबारियों के साथ आम जनता को भी कूड़ा शुल्क में राहत देने का मामला उठाया। 
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नगर निगम सदन के फैसले जो जनता को देंगे राहत

MC Shimla house decisions: Tax relief to hotels and businesses, garbage charges will also be reduced, read big decisions
शिमला नगर निगम की मासिक बैठक। - फोटो : अमर उजाला
  • नगर निगम सदन के फैसले जो जनता को देंगे राहत
  • शहर में नगर निगम की दुकानों के लिए लगेगी अब ओपन बोली, किराया तय करेगी कमेटी
  • लीज पर दी संपत्तियां वारिसों को मिलेंगी, अतिरिक्त आयुक्त विधि देखेेंगे मामले
  • भराड़ी गेस्ट हाउस, टका बैंच बुक कैफे का किराया माफी का प्रस्ताव सरकार को भेजेंगे
  • टाउनहाल की टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश, टुटीकंडी रोपवे को भी छह माह की एक्सटेंशन
  •  
  • न्यू शिमला से वाया रझाणा मेहली शोघी बाईपास को जोड़ेगी सड़क, खर्च होंगे तीन करोड़
  • जिन स्थानों पर ज्यादा आवाजाही, वहां शिफ्ट होंगे वाटर एटीएम, ई टायलेट
  • नोटिस के बाद सीपीडब्ल्यूडी ने जमा करवाया कूड़ा शुल्क का 2.96 करोड़
  • मज्याठ में 25 लाख से बनेगा मैदान, अपर चक्कर से कामनादेवी तक बनेगी सड़क
  • सब्जी मंडी, रामबाजार, लोअर बाजार में पुरानी दुकानें तोड़ने को मंजूरी, चार ब्लॉक भी टूटेंगे
  • 15 किलो सिंगल यूज प्लास्टिक देने पर सैहबकर्मी को देंगे पांच हजार, पार्षद को एक लाख रुपये
  • मोबाइल ऐप पर मिलेंगी एमसी की सारी आनलाइन सेवाएं, पेटीएम से भी कर सकेंगे बिल भुगतान
  • संजौली चौक पर बनेगा फुट ओवर ब्रिज, गुरुद्वारे के साथ आईजीएमसी रोड भी होगा कनेक्ट
  • पद्मदेव परिसर का होगा सौंदर्यीकरण, लोक निर्माण विभाग करेगा काम
  • अटल की तरह भगत सिंह, विवेकानंद की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव भाषा विभाग को भेजेंगे
  • जो किराया नहीं देंगे, उन टावरों का बिजली काटेगा नगर निगम
  • दुकानें तोड़कर निकलने वाला मटीरियल संबंधित महकमा बेचेगा, एमसी को इसका देगा पैसा
  • कोरोनाकाल में सरकार ने दिया था एक करोड़, अब और पैसों की होगी मांग

कूड़ा बिल में राहत न देने पर मेयर  दफ्तर के बाहर पूर्व पार्षद का धरना

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धरने पर बैठे पार्षद - फोटो : अमर उजाला

 शहरवासियों के कोरोनाकाल के दौरान के कूड़ा बिल माफ न करने के विरोध में नगर निगम के पूर्व कांग्रेस पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने सोमवार को मेयर दफ्तर के बाहर धरना दिया। मासिक सदन से पहले मेयर दफ्तर पहुंचे भट्ठाकुफर के पूर्व पार्षद ने कहा कि निगम होटल कारोबारियों को तो राहत देने जा रहा है, लेकिन आम जनता के लिए कोई छूट नहीं दी जा रही।   कोरोनाकाल में शहर से ज्यादातर लोग गांव लौट गए थे। कई ऐसे थे जिनकी नौकरियां चली र्गइं। मजदूरी करने वाले लोग दिहाड़ी तक नहीं लगा पाए। लेकिन निगम इन सबको कूड़े के बिल जारी कर रहा है।

आम जनता को भी राहत देनी चाहिए। आरोप लगाया कि भाजपा शासित नगर निगम जानबूझ कर यह प्रस्ताव टालने के लिए इसे सरकार को भेजने का ड्रामा कर रहा है। शहर में जब कूड़ा शुल्क बढ़ाया था तब सरकार की मंजूरी नहीं ली लेकिन जब राहत देने की बात आई तो सरकार को प्रस्ताव भेजने का ड्रामा किया जा रहा है। मेयर और डिप्टी मेयर समेत भाजपा पार्षद कूड़ा शुल्क से राहत देने के लिए एक बार भी सीएम या मंत्री से मिलने नहीं गए। ऐसे में जनता को राहत कैसे मिलेगी। बाद में डिप्टी मेयर शैलेंद्र चौहान ने राहत का भरोसा देकर पूर्व पार्षद का धरना खत्म किया। पूर्व पार्षद ने कहा कि जब तक राहत नहीं मिल जाती, लोगों को कूड़े के बिल जारी न किए जाएं।

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