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कोरोना काल में एमबीए पास प्राकृत उगा रहे स्ट्रॉबेरी, 250 रुपये किलो मिल रहे दाम

Tue, 13 Apr 2021 10:53 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Apr 2021 10:53 AM IST
सार

  • हवाई मार्ग से महाराष्ट्र के सोलापुर से मंगवाए थे स्ट्रॉबेरी के पौधे
  • आपदा को अवसर बनाकर स्ट्राबेरी की खेती से कमा रहे है मुनाफा
  • शौक ने प्राकृत को बना दिया सफल बागवान 

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MBA Prakrit growing strawberries in Coronavirus period, Rs 250 per kg
कोरोना काल में एमबीए पास प्राकृत उगा रहे स्ट्रॉबेरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आपदा को अवसर में कैसे बदला जाता है, यह हमीरपुर के 24 वर्षीय प्राकृत लखनपाल से सीखने की जरूरत है। प्राकृत ने स्ट्रॉबेरी उगाकर हमीरपुर में अपनी अलग पहचान बना ली है। खेतों में उगाई स्ट्रॉबेरी बाजार में 200 से 250 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से हाथोंहाथ बिक रही है। प्राकृत लखनपाल ने रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए किया हुआ है। शौक ने उन्हें सफल बागवान बना दिया। मार्च 2020 में जब देशभर में कोरोना महामारी के कारण जब लॉकडाउन लगा तो कई की नौकरी छूट गई। 

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आपदा को अवसर में बदलने की अपील से प्रभावित होकर हमीरपुर के प्राकृत लखनपाल ने स्ट्रॉबेरी की खेती कर खूब मुनाफा कमाया। उन्होंने इंटरनेट के जरिये देश में स्ट्रॉबेरी के बेहतरीन पौधों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि महाराष्ट्र के सोलापुर में अच्छे उत्पादन वाले स्ट्रॉबेरी के पौधे मिलते हैं। लॉकडाउन के कारण सड़क से इन पौधों को सोलापुर से मंगवाना आसान नहीं था। प्राकृत ने स्ट्रॉबेरी के करीब एक हजार पौधों की डिमांड संबंधित कंपनी को भेजी और हवाई मार्ग से महाराष्ट्र से चंडीगढ़ मंगवाए।
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चंडीगढ़ से हमीरपुर तक सड़क के जरिये यह पौधे लाए गए। इसके बाद उन्होंने नवंबर-दिसंबर माह में विकासनगर में अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे। यहां एक निजी स्कूल के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया। साथ ही खरपतवार से फसल को बचाने के लिए स्ट्रॉबेरी के पौधों के आसपास पॉलिथीन का इस्तेमाल किया गया। उधर, प्राकृत के पिता पंकज लखनपाल ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उनके बड़े बेटे ने महाराष्ट्र से स्ट्रॉबेरी के पौधे मंगवाए थे, जिनसे वर्तमान में अच्छी पैदावार हुई है। बेटे ने बंजर जमीन पर  नींबू और संतरे समेत विभिन्न प्रजातियों के फलदार पौधे भी लगाए हैं।

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