जंगलों में आग बेकाबू, तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वन राख
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हिमाचल प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच जंगलों में भड़की आग बेकाबू हो गई है और विभाग तमाशा ही देख रहा है। फायर सीजन को लेकर वन विभाग की तैयारियों के बावजूद हिमाचल में डेढ़ महीने के भीतर तीन हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो गया है। एक अप्रैल से लेकर अभी तक आग की करीब पौने सात सौ घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
बावजूद इसके विभाग तर्क दे रहा है कि यह फायर सीजन से निपटने की तैयारियों का ही नतीजा है कि इस साल आग की ज्यादातर घटनाओं को 12 घंटे से कम समय में रोका जा रहा है। वहीं, पिछले साल पूरे सीजन के दौरान साढ़े छह सौ घटनाएं हुई थीं। बिलासपुर और शिमला जिले में आगजनी की सर्वाधिक घटनाएं हुई हैं।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो हर तीन से चार साल में आग की घटनाएं बढ़ती थीं, लेकिन पहली बार है जब दो साल में ही जंगल की आग की घटनाएं बढ़ी हैं। नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग ने इस साल करीब बीस हजार किलोमीटर से ज्यादा की फायर लाइन तैयार की थी।
इसके अलावा चार सौ से ज्यादा फायर वॉचर लगाए। सेटेलाइट से आग लगने की सूचना मिलने पर वन विभाग के साथ स्थानीय लोगों तक एसएमएस से सूचना पहुंचाई जा रही है। स्थानीय लोग आग बुझाने में मदद कर रहे हैं, लेकिन इस सब के बावजूद गर्मी बढ़ने, हवा चलने और पानी के संकट के चलते आग से निपटने में परेशानी आ रही है।
उधर, हमीरपुर जिले के आधा दर्जन जंगल रविवार को आग की भेंट चढ़ गए। इन जंगलों में बड़सर का जंगल, टाउन भराड़ी का जंगल, अणु, मनोह, लोहाखर आदि शामिल है। भराड़ी के जंगल में लगी आग के कारण लोक निर्माण विभाग का स्टोर भी जल गया है।
इससे भारी नुकसान हुआ है। स्टेशन फायर ऑफिसर राजेंद्र चौधरी का कहना है कि दमकल विभाग की टीमें आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। रविवार को करीब 16 हेक्टेयर जंगल भूमि वनों में आग से प्रभावित हुई है।
कहां, क्या है हाल
जिला आगजनी प्रभावित क्षेत्र
बिलासपुर 850 हेक्टेयर
चंबा 100 हेक्टेयर
कांगड़ा 200 हेक्टेयर
हमीरपुर 625 हेक्टेयर
मंडी 375 हेक्टेयर
सिरमौर 180 हेक्टेयर
शिमला 625 हेक्टेयर
सोलन 160 हेक्टेयर
हेरिटेज ट्रैक तक पहुंची जंगल की आग, रोकनी पड़ गई ट्रेन
सोलन के जंगलों में लगी आग की आंच कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक तक पहुंच गई है। रेल ट्रैक के पास पहुंचीं आग की लपटों ने लगातार दूसरे दिन ट्रेन को परिचालन को रोक दिया। रविवार को देशी-विदेशी सैलानियों को लेकर कालका से शिमला आ रही ट्रेन को कोटी के पास सुबह नौ बजे रोकना पड़ा।
आग की वजह से एहतियातन रोकी गई ट्रेन को करीब आधे घंटे बाद रवाना किया गया। रविवार सुबह ही दस बजे के करीब कोटी और सनावर के बीच रेलकार को एक घंटे तक रोकना पड़ा। इससे पूर्व शनिवार को भी रेलगाड़ी को इसी वजह से तीन घंटे रोकना पड़ा था। गौर हो कि पिछले कई दिनों से इन जंगलों में आग लगी है।
इससे वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। अब इसका असर कालका-शिमला रेल ट्रैक पर देखने को मिल रहा है। बीच रास्ते में ट्रेन के खड़ा रहने से बाहरी राज्यों से शिमला आ रहे पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हेरिटेज मार्ग पर समर सीजन के चलते हजारों लोग रेल से सफर कर रहे हैं, लेकिन जंगल की आग ट्रैक के पास तक फैलने से ट्रेन सेवा का शेड्यूल बिगड़ गया है। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि जंगलों की आग रेलवे ट्रैक तक पहुंचने के कारण ट्रेनों को रोकना पड़ रहा है। दो दिन से लगातार आग लगने का सिलसिला जारी है।
नहीं शांत हो रहीं आग की लपटें- पिछले तीन दिन से धर्मपुर और कसौली के जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी है। दमकल विभाग, वन विभाग की टीमें आग बुझाने में लगी हैं, लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया है। जंगलों में ऐसे ही आग फैलते रहने पर आने वाले दिनों में हेरिटेज ट्रैक पर पर्यटकों को और अधिक परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।