शहीद सूबेदार रिनजिन दोरजे पंचतत्व में विलीन
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शहीद सूबेदार रिनजिन दोरजे शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। 14500 फुट की ऊंचाई पर बसे उनके पैतृक गांव चिचम में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। बौद्ध लामाओं ने पूजा-पाठ एवं मंत्रोच्चारण कर बौद्ध विधि-विधान से यज्ञ अनुष्ठान किया।
शहीद सूबेदार रिनजिन दोरजे के आठ वर्षीय तनजिन वोत्सल ने पिता की देह को मुखाग्नि दी। शहीद के अंतिम संस्कार में 136 इंडिपेंडेंट इंफेंट्री ब्रिगेड के कमांडर एलएस लीडर, डोगरा स्काउट के सीओ नितिन मित्तल सहित कई
अधिकारियों एवं जवानों ने शहीद सूबेदार रिनजिन के पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। शौर्य चक्र विजेता कैप्टन छेरिंग नोरबू और स्थानीय विधायक एवं मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने भी अंतिम संस्कार में पहुंच कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
13 पंचायतों के प्रतिनिधि शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना देने पहुंचे
स्पीति प्रशासन से एडीएम विक्रम सिंह नेगी, एसडीएम जीवन सिंह नेगी, डीएसपी मुकेश कुमार सहित सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी पहुंचे थे। स्पीति घाटी की सभी 13 पंचायतों के प्रतिनिधि शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना देने चिचम पहुंचे और शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
स्पीति घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों लोग शहीद के अंतिम यात्रा में शामिल हुए। नुन पीक एक्सपिडिशन के दौरान स्पीति घाटी के दो और जवान वांकदुई और सोनम छेरिंग भी शामिल थे। इन्हें भी चोट लगी है। घायल जवान वांकदुई शहीद सूबेदार के ही गांव चिचम से हैं। उनका इलाज चल रहा है।