फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   Manimahesh Yatra 2023 Lord Shiva and Goddess Gaura Story in connection with Gangaajal

मणिमहेश यात्रा: भगवान शंकर को पाने के लिए मां गौरा ने यहीं किया था तप, गंगाजल के साथ जुड़ी है ये मान्यता

Thu, 14 Sep 2023 03:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, भरमौर (चंबा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भरमौर (चंबा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 14 Sep 2023 03:04 PM IST
सार

महंत आकाश गिरी और महाकाल गिरी बताते है कि गौरीकुंड मां की तपस्थली है। यहां आज भी देवता भगवान शंकर की तपस्या में लीन हैं।

विज्ञापन
Manimahesh Yatra 2023 Lord Shiva and Goddess Gaura Story in connection with Gangaajal
मां गौरा की तपोस्थली गौरीकुंड और मूर्ति। यहां महिलाएं पूजा करती हैं। - फोटो : संवाद

विस्तार

मणिमहेश यात्रा के दौरान गौरीकुंड पड़ाव से श्रद्धालु गंगाजल लेकर नहीं जाते हैं। मान्यता है कि गौरीकुंड के पास से जब कोई गंगाजल लेकर गुजरता है तो कुंड के पानी में उबाल आने लगता है। इतना ही नहीं, यदि कोई गलती से भी गौरीकुंड में गंगाजल की एक बूंद भी डाल दे तो यह कुंड पूरी तरह सूख जाता है। ऐसे में जो भी श्रद्धालु डल झील पर गंगा जल चढ़ाने के लिए लाते हैं, वे दूसरे रास्ते से ही अगले पड़ाव के लिए रवाना हो जाते हैं।

विज्ञापन


महंत आकाश गिरि और महाकाल गिरी बताते हैं कि मां गौरा ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठोर तप यहीं पर किया था। आज भी देवता यहां भगवान शंकर की भक्ति में लीन रहते हैं। महंत आकाश गिरी और महाकाल गिरी बताते है कि गौरीकुंड मां की तपस्थली है। यहां आज भी देवता भगवान शंकर की तपस्या में लीन हैं।

विज्ञापन

Manimahesh Yatra 2023 Lord Shiva and Goddess Gaura Story in connection with Gangaajal
गौरीकुंड। - फोटो : संवाद

गौरीकुंड में स्नान के बाद सुहागी चढ़ाती हैं महिलाएं
बता दें कि गौरीकुंड समुद्रतल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर है। माता गौरा के इस पड़ाव की अपने आप में विशेष महत्ता है। खासतौर पर महिलाएं गौरीकुंड पर स्नान करने के बाद माता की चिह्न रूपी मूर्ति की पूजा-अर्चना करती हैं। सुहागिन महिलाएं माता को सुहागी का सामान चढ़ाती हैं। मां से सुहाग की लंबी उम्र का वर मांगती है। अविवाहित युवतियां योग्य और मनवांछित वर मांगती हैं।


गौरीकुंड पहुंचते ही खत्म हो जाती है 10 किमी की चढ़ाई चढ़ने की थकान
पवित्र मणिमहेश यात्रा के सुंदरासी पड़ाव से आगे श्रद्धालु भैरोंघाटी और ग्लेशियर प्वाइंट से होकर अपने अगले पड़ाव गौरीकुंड पहुंचते हैं। गौरीकुंड पड़ाव पर पहुंचते ही 10 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने की थकान एकदम दूर हो जाती है। यहां करीब से भगवान शंकर के कैलाश के दर्शन पाकर मन गदगद हो जाता है।

यह मां गौरा का पवित्र पावन धाम है। गौरीकुंड पड़ाव में माता गौरा की संगमरमर की मूर्ति के साथ पवित्र भी कुंड है। इस पवित्र कुंड में स्त्रियां ही स्नान करती है। सुंदरासी से श्रद्धालु जब गौरीकुंड पहुंचते हैं तो कुछ पल के लिए जरूर रुकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed