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रोहतांग दर्रे में यातायात बंद रहने से बदली मनाली की आबोहवा
Thu, 27 May 2021 10:46 AM IST
Krishan Singh
मनु शर्मा, अमर उजाला, मनाली (कुल्लू)
मनु शर्मा, अमर उजाला, मनाली (कुल्लू)
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 27 May 2021 10:46 AM IST
सार
भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि मनाली और रोहतांग के आसपास तापमान में गिरावट और मई में भी पहाड़ों में बर्फबारी होने ग्लेश्यिरों के पिघलने की रफ्तार कम होगी, जो भविष्य के पानी की समस्या के लिए अच्छा संकेत है।
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बर्फ से लकदक मनाली की चोटियां।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना काल से ठहरे जनजीवन से कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सैलानियों से गुलजार रहने वाला 13050 फीट ऊंचा रोहतांग दर्रा दो वर्षों से सुनसान रहने से यहां की आबोहवा ही बदल गई। कोरोना के चलते पर्यावरण में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लगातार दूसरे वर्ष रोहतांग दर्रा मई में बहाल नहीं हुआ। आलम यह है कि मनाली की ऊझी घाटी में तापमान में आ रहे परिवर्तन से लोग मई में भी आग का सहारा ले रहे हैं।
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घाटी में चारों ओर हरियाली ही हरियाली होने से नजारा ही बदल गया है। लोगों को ऐसा लग रहा है कि 35 वर्ष पुरानेे यानी 80 या 90 के दशक के मौसम में जीवन बिता रहे हैं। भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि मनाली और रोहतांग के आसपास तापमान में गिरावट और मई में भी पहाड़ों में बर्फबारी होने ग्लेश्यिरों के पिघलने की रफ्तार कम होगी, जो भविष्य के पानी की समस्या के लिए अच्छा संकेत है। पर्यावरण प्रेमी किशन लाल ने बताया कि कोरोना काल के दौरान लगातार दूसरे वर्ष घाटी के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
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मनाली का वातावरण 80 के दशक की तरह महसूस किया जा रहा है। जेएनयू में भूगर्भ शास्त्री और पर्यावरण और ग्लेश्यिरों पर शोध कर रहे मिलाप शर्मा ने बताया कि मौसम हमेशा बदलता रहता है, लेकिन कोरोना काल में लगातार दूसरे वर्ष रोहतांग दर्रे पर वाहन नहीं जा रहे हैं। इससे रोहतांग के साथ-साथ मनाली में वायु प्रदूषण नहीं हो रहा है और पर्यावरण की आबोहवा साफ-सुथरी हुई है। पर्यटकों के साथ-साथ ट्रैकर और पर्वतारोहियों की गतिविधियां भी बंद हैं और इसका फायदा प्रकृति को होगा।
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रोहतांग दर्रे पर इन दिनों पहुंचते थे हजारों पर्यटक
13051 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटन सीजन में हजारों वाहन पहुंचते हैं। हालांकि पांच से छह साल पूर्व यहां रोजाना आठ से दस हजार वाहन पहुंचते थे। इससे न केवल रोहतांग, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में बर्फ की परत काली होने लगी थी। ग्लेशियर भी तेजी से पिघलने लगे थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कुल्लू के सहायक अभियंता सुनील शर्मा ने कहा कि कोरोना के कारण मनाली और रोहतांग में पर्यटक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप है, जिसका लाभ पर्यावरण को मिलेगा।