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Shimla News: चेक बाउंस के मामले में मैनेजर दोषी करार, एक साल कारावास की सजा
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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत का फैसला, दोषी ने 21 लाख रुपये का जारी किया था चेक
अब दोषी को 42 लाख रुपये का करना होगा भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक शिमला की अदालत ने 21 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल की कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर चेक राशि से दोगुना यानी 42 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में दोषी को छह महीने का अतिरिक्त सादा कारावास भुगतना होगा। मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत में हुई। शिकायत के अनुसार वर्ष 2013-14 के लिए आबकारी यूनिट सब्जी मंडी-द्वितीय जिसमें एल-2 लोअर बाजार टनल और एल-14 सब्जी मंडी-द्वितीय की शराब की दुकानें शामिल थीं, नरेंद्र सिंह को आवंटित की थी।
आबकारी लाइसेंस की शर्तों के अनुसार लाइसेंस को नियमित रूप से मासिक आबकारी राजस्व और लाइसेंस फीस जमा करवानी थी। समय पर भुगतान न करने के कारण लाइसेंसी डिफाल्टर हो गया और 31 मार्च 2014 तक करीब 1.10 करोड़ रुपये की राशि बकाया हो गई थी। पंजाब निवासी दोषी सतीश कुमार जो एक्साइज लाइसेंसधारी का मैनेजर और अकाउंटेंट था ने बकाया लाइसेंस फीस के भुगतान के लिए 2 मई 2014 को अंडरटेकिंग पत्र और पोस्ट डेटिड चेक जारी किया था। बकाया लाइसेंस फीस के एवज में दिया 21 लाख रुपये का चेक शिकायतकर्ता की ओर से बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन वह बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन आयुक्त सतीश कुमार शर्मा की ओर से अदालत में मामला दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने खुद को केवल सेल्समैन बताते हुए दलील दी कि चेक और अंडरटेकिंग उससे दबाव में ली थी। अदालत ने इस दलील को पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर और कानूनी नोटिस की तामील विधिवत रूप से साबित हुई है। दोषी पक्ष की ओर से पहली बार अपराध होने के आधार पर सजा में नरमी देने की अपील की थी लेकिन अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।
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अब दोषी को 42 लाख रुपये का करना होगा भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक शिमला की अदालत ने 21 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल की कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर चेक राशि से दोगुना यानी 42 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में दोषी को छह महीने का अतिरिक्त सादा कारावास भुगतना होगा। मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत में हुई। शिकायत के अनुसार वर्ष 2013-14 के लिए आबकारी यूनिट सब्जी मंडी-द्वितीय जिसमें एल-2 लोअर बाजार टनल और एल-14 सब्जी मंडी-द्वितीय की शराब की दुकानें शामिल थीं, नरेंद्र सिंह को आवंटित की थी।
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आबकारी लाइसेंस की शर्तों के अनुसार लाइसेंस को नियमित रूप से मासिक आबकारी राजस्व और लाइसेंस फीस जमा करवानी थी। समय पर भुगतान न करने के कारण लाइसेंसी डिफाल्टर हो गया और 31 मार्च 2014 तक करीब 1.10 करोड़ रुपये की राशि बकाया हो गई थी। पंजाब निवासी दोषी सतीश कुमार जो एक्साइज लाइसेंसधारी का मैनेजर और अकाउंटेंट था ने बकाया लाइसेंस फीस के भुगतान के लिए 2 मई 2014 को अंडरटेकिंग पत्र और पोस्ट डेटिड चेक जारी किया था। बकाया लाइसेंस फीस के एवज में दिया 21 लाख रुपये का चेक शिकायतकर्ता की ओर से बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन वह बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन आयुक्त सतीश कुमार शर्मा की ओर से अदालत में मामला दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने खुद को केवल सेल्समैन बताते हुए दलील दी कि चेक और अंडरटेकिंग उससे दबाव में ली थी। अदालत ने इस दलील को पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर और कानूनी नोटिस की तामील विधिवत रूप से साबित हुई है। दोषी पक्ष की ओर से पहली बार अपराध होने के आधार पर सजा में नरमी देने की अपील की थी लेकिन अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।