पांच वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल करने वाले आयरनमैन हैं मेजर जोशी
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भारतीय सेना में सेवारत मेजर नितिन जोशी किसी पहचान के मोहताज नहीं। आज पूरे देश में सेना के जवानों और हजारों युवाओं में जज्बा भरने वाले मेजर जोशी का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर रियल आर्मी आयरनमैन में गिना जाता है। माउंटेन मैराथन में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ ही अपने नाम पांच वर्ल्ड रिकॉर्ड करने वाले गुजरात के रहने वाले इस रियल हीरो का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा है।
उनकी हाल ही में सुबाथू में पोस्टिंग हुई है। किसान के इस बेटे को घर की परिस्थितियों ने तो खूब हराया, लेकिन बुलंद हौसले में कमी नहीं आई। पढ़ाई पूरी करने के लिए चौथी कक्षा में ही अखबार बांटे और देर रात तक एसटीडी बूथ पर नौकरी के साथ स्ट्रीट लाइटों की रोशनी में पढ़ाई की। नितिन अच्छे क्रिकेट खिलाड़ी भी थे। स्पोर्ट्स कोटे से नितिन की ज्वाइनिंग भारतीय सेना में हुई।
शानदार गेंदबाजी से जोशी ने कई टॉफी भी जीतीं। लेकिन एक हादसे ने उनके इस हुनर को फिर से कमजोर करना चाहा। टेनिस खेलते हुए उनके बाएं हाथ की हड्डी के तीन टुकड़े हो गए। लेकिन इस परिंदे को तो आसमान छूना था। एक बार हौसले की उड़ान भरते हुए नितिन ने अपने पैरों का कमाल दिखाया। जोशी के जज्बे ने कुछ ऐसा इतिहास रचा, जिसके लिए खुद मिल्खा सिंह ने उन्हें गुजराती मिल्खा सिंह का दर्जा भी दिया।
ये हैं मेजर नितिन जोशी की उपलब्धियां
हाथ में तिरंगा लेकर रिवर्स मैराथन रनर में दौड़ने वाले नितिन देश के पहले रनर हैं। लगातर 24 घंटे 134 किलोमीटर राष्ट्रीय ध्वज लेकर दौड़ने वाले मेजर को प्रथम भारतीय अनस्टापेबल मैराथन रनर का कीर्तिमान मिला। उन्होंने गुजरात के जूनागढ़ में 2015 में माउंटेन मैराथन में भी एक हाथ में तिरंगा लेकर गिनीज बुक में नाम दर्ज करवाया है।
मेजर रेंडोनियर साइकिलिंग प्रतियोगिता में तिरंगा हाथ में लेकर नौ घंटे के भीतर 200 किलोमीटर साइकिलिंग करने वाले पहले भारतीय हैं। इन सभी उपलब्धियों से मेजर जोशी को आर्मी आयरनमैन के नाम से जाना जाता है। मेजर ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि युवा अपनी प्रतिभा को नशे और फैशन में नष्ट न करें। अपने तन-मन को स्वस्थ बनाएं।
भारतीय सेना बनाती है आम आदमी को सुपरमैन- नितिन जोशी ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि उन्हें शाहरुख खान के फौजी नाटक से सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिला थी। बस इसके बाद लक्ष्य को साधना ही उनके लिए जुनून बन गया था। भारतीय सेना एक ऐसी संस्था है।
जो हमेशा एक आम आदमी को सुपरमैन बनाने का प्रशिक्षण देती है। मेघालय में एक प्रतियोगिता के दौरान मेजर ने 2500 किलो बर्फ में 29 मिनट रहकर एक और इतिहास रचा है। उन्हें अब आइसमैन के नाम से भी जाना जाता है।