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Himachal Apple Season: हिमाचल में पांच साल में सबसे कम सेब उत्पादन, 1.78 करोड़ पेटी में सिमटा कारोबार

Sat, 04 Nov 2023 09:46 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 04 Nov 2023 09:46 AM IST
सार

बीते साल के मुकाबले इस साल करीब 1 करोड़ 58 लाख पेटी सेब कम हुआ। प्रदेश में इस साल राज्य कृषि विपणन बोर्ड की मंडियों में करीब 88 लाख 92 हजार और मंडियों के बाहर 89 लाख 66 हजार पेटियों का कारोबार हुआ है। 

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Lowest apple production in Himachal in five years, business limited to 1.78 crore boxes
हिमाचल का सेब। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब सीजन करीब 1 करोड़ 78 लाख पेटी में ही सिमट गया है। यह पांच साल में सबसे कम है।  बीते साल के मुकाबले इस साल करीब 1 करोड़ 58 लाख पेटी सेब कम हुआ। सेब खरीद करने वाली सबसे बड़ी निजी कंपनी अदाणी एग्रो फ्रेश भी इस साल 16,000 मीट्रिक टन सेब ही खरीद पाई है, जबकि लक्ष्य 25,000 मीट्रिक टन का था। एचपीएमसी और हिमफैड ने करीब 53,000 मीट्रिक टन सेब की खरीद की है।  

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प्रदेश में इस साल राज्य कृषि विपणन बोर्ड की मंडियों में करीब 88 लाख 92 हजार और मंडियों के बाहर 89 लाख 66 हजार पेटियों का कारोबार हुआ है। हालांकि, सेब की कम उपज और किलो के हिसाब से सेब बिक्री के चलते बागवानों को फसल के अच्छे दाम मिले। मौसम की बेरुखी से इस साल सेब उत्पादन प्रभावित हुआ। शुरुआत से ही मौसम ने साथ नहीं दिया। सर्दियों में कम बर्फबारी से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हुए और फरवरी में सूखे जैसे हालात रहे। मार्च के बाद शुरू हुआ बारिश का दौर अप्रैल-मई-अगस्त तक जारी रहा।
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बारिश, ओलावृष्टि और असमय बर्फबारी से फ्लावरिंग को नुकसान हुआ। गर्मियों में फ्लावरिंग के दौरान जब तापमान औसत 15 डिग्री जरूरी था तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 8 डिग्री से भी नीचे लुढ़क गया। ठंड से पॉलिनेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। अप्रैल, मई में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ। अच्छे रंग और आकार के लिए जब धूप जरूरी थी तब प्री-मानसून की बारिश से नुकसान हुआ। उत्पादन गिरने का कारण जलवायु परिवर्तन भी माना जा रहा है, जिससे निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।

हालांकि, किन्नौर में करीब 4 लाख पेटी सेब अभी मंडी में पहुंचना बाकी है। इस सीजन में अदाणी को भारी नुकसान का अंदेशा है। फसल कम और गुणवत्ता सही न होने से रामपुर, सैंज और रोहड़ू स्थित सीए स्टोर क्षमता के अनुसार पूरे नहीं भर पाए। अदाणी ने पहली बार पराला,पंचकूला और लाफूघाटी मंडी से भी सेब खरीद की। इस साल अदाणी ने अधिकतम 110 रुपये किलो तक सेब खरीद की और क्वालिटी कंट्रोल भी नहीं रखा। फिलहाल जो सेब कंपनी के सीए स्टोर में है वह मार्च के बाद बाहर निकलेगा। 

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फसल कम पर बागवानों को मिले रिकॉर्ड दाम : नेगी
उधर, इस बारे में बागवानी एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि इस साल भले ही फसल कम रही लेकिन किलो के हिसाब से बिक्री की व्यवस्था शुरू होने से बागवानों को उपज के रिकॉर्ड दाम मिले। मंडियों में सेब के औसत दाम 140 से 160 रुपये किलो तक मिले। मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित हुआ। अब तक करीब 1.78 लाख पेटी सेब का विपणन हो चुका है। 

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