ब्रश और रंगों से प्यार ने बना दिया चित्रकार, अब तक बनाईं 40 पेंटिंग
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रैहन की स्वाति चंबियाल होनहार चित्रकार बन गई हैं। रैहन के नरेंद्र सिंह और अनु चंबियाल के घर जन्मीं स्वाति वनस्पति विज्ञान में एमएससी कर रही हैं। ब्रश और रंगों से उन्हें ऐसा प्यार हुआ कि वे पढ़ाई के साथ चित्रकार भी बन गईं।
स्वाति ने प्रारंभिक शिक्षा गुरदासपुर से प्राप्त की। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रैहन से जमा दो के साथ देहरी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2014-15 में इंटर कॉलेज स्पॉट फोटोग्राफी में स्वाति ने हिमाचल में प्रथम स्थान हासिल किया, लेकिन किन्हीं कारणों से इंटर स्टेट कंपीटिशन में हिस्सा नहीं ले पाईं।
पंजाबी विवि पटियाला से वनस्पति विज्ञान में एमएससी करने वाली स्वाति ने मात्र आठवीं कक्षा तक ही ड्राइंग विषय पढ़ा। उनकी रुचि बचपन से चित्रकारी में रही है। उन्होंने चित्रकारी के गुर मां अनु चंबियाल से ही बचपन में ही सीखने शुरू किए।
चित्रकार के रूप में मां को प्रथम गुरु मानती हैं स्वाति
उनकी मां तीज त्योहार, विवाह-शादी के समय घर को रंगोली या दीवारों को चित्रकारी से सजाती थीं। मां को देखते स्वाति ने भी दीवारों को रंगना और रंगोली में रंग भरना शुरू किया। अभी तक स्वाति ने लगभग 40 पेंटिंग बनाई हैं।
वह चित्रकार के रूप में मां को प्रथम गुरु मानती हैं। प्रकृति प्रेमी स्वाति को घूमना बहुत पसंद है। प्राकृतिक दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करने भी शौक है। वाटर कलर, पोस्टर कलर व फेब्रिक कलर का प्रयोग करने वाली स्वाति की कलेक्शन में लगभग 40 पेंटिंग हैं।
स्वाति का बेडरूम एक आर्ट गैलरी की तरह है। स्वाति की तमन्ना है कि वे चित्रकला में माता-पिता और प्रदेश का नाम रोशन करें। स्वाति सुप्रसिद्ध चित्रकार एमएफ हुसैन, सतीश गुजराल और ओपी टॉक की तरह नाम कमाना चाहती हैं।