प्रदेश में सोशल मीडिया पर चुनावी जंग तेज
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हिमाचल में लोकसभा चुनाव की जंग सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। सबसे ज्यादा प्रयोग फेसबुक का हो रहा है। इसके अलावा प्रचार के लिए ट्विटर और वाट्सऐप का चलन भी बढ़ रहा है।
फेसबुक पर अनुराग ठाकुर के पेज पर सबसे ज्यादा 3.90 लाख लाइक्स हैं। करीब 90 हजार कमेंट उनको लेकर फेसबुक पर हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर करीब 28 हजार लाइक्स हैं।
मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह के पेज पर 14 हजार लाइक्स अब तक हैं। ये पेज चुनाव प्रचार के लिए ही लांच किया गया है। कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार के पेज पर करीब 4 हजार लाइक्स रजिस्टर्ड हैं।
राजेंद्र राणा के फेसबुक पर करीब 5000 दोस्त
हमीरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र राणा के पास फेसबुक पर करीब 5000 दोस्त हैं। मजे की बात ये है कि इनमें भाजपा हमीरपुर जिलाध्यक्ष विजय अग्निहोत्री, भाजपा संगठन महामंत्री पवन राणा, भाजपा उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह और चेतन बरागटा आदि कई नाम हैं।
राजेंद्र राणा अपने हर दिन का टूअर फेसबुक पर डाल रहे हैं। वह हर जनसभा की फोटो भी अपलोड कर रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर और शांता कुमार की जनसभाओं के फोटो हर रोज अपलोड हो रहे हैं।
कांग्रेस में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दौरे और प्रतिभा सिंह की जनसभाएं भी फेसबुक पर हैं।
चंद्र, कश्यप और ब्राक्टा सोशल मीडिया से दूर
कांगड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र कुमार, शिमला से प्रत्याशी वीरेंद्र कश्यप और मोहनलाल ब्राक्टा सोशल मीडिया से दूर हैं। इनका कोई आधिकारिक अकाउंट वर्तमान में नहीं है।
हालांकि इनके प्रचार और जनसभाओं के फोटो राजनीतिक दलों के माध्यम से सोशल मीडिया पर कभी कभी दिखते हैं।
राजन सुशांत की वाल पर मोदी विरोधी पोस्टर
आम आदमी पार्टी के कांगड़ा से प्रत्याशी राजन सुशांत के फेसबुक अकाउंट की वाल पर मोदी विरोधी पोस्टर लगा हुआ है।
इसमें भाजपा के विज्ञापन जनता माफ नहीं करेगी को नए रूप में प्रदर्शित किया गया है।
ये पोस्टर कहता है कि अपनी पत्नी को छोड़ने वाले, जनता माफ नहीं करेगी।
अब बल्क मोबाइल एसएमएस की रणनीति
सोशल मीडिया पर सक्रियता के बाद अब राजनीतिक दल बल्क मोबाइल एसएमएस की रणनीति भी अपनाएंगे। कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने आईटी विंग को ये काम दे रखा है।
राष्ट्रीय नेताआें की रैलियाें, वोट अपील और अन्य चुनावी सूचनाओं के लिए अब मोबाइल पर एसएमएस भेजे जाएंगे। प्रचार के आखिरी हफ्ते में इस तकनीकी का प्रयोग प्रचार में किया जाएगा।