कांगड़ा में पर्दे के पीछे बिछ गई उपचुनाव की बिसात
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लोकतंत्र के महापर्व के दौरान कांगड़ा सीट में दिलचस्प पहलू यह बन गया है कि यहां पर लोकसभा के साथ विधानसभा के उपचुनाव की तैयारी भी अंदरखाते जोरशोर से चल रही है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर जीतें या कांग्रेस उम्मीदवार पवन काजल, विधानसभा का उपचुनाव होना तय है। ऐसे में उपचुनाव की चाह में धर्मशाला और कांगड़ा की सेकेंड लाइन लीडरशिप लोकसभा के साथ उपचुनाव की तैयारियां भी अंदरखाते साथ-साथ कर रही है।
कांगड़ा और धर्मशाला में सेकेंड लाइन लीडरशिप के नेताओं को लोकसभा चुनाव के अक्स के पीछे उपचुनाव के लिए विधायक का टिकट दिख रहा है। इस निहितार्थ राजनीतिक परिदृश्य को देखकर इन नेताओं का जोश दोगुना हो रहा है।
धर्मशाला में किशन कपूर के बाद सेकेंड लाइन लीडरशिप में राकेश शर्मा, संजय शर्मा, उमेश दत्त, विशाल नैहरिया, गायत्री कपूर सहित कई और नेता खुद को कपूर का उत्तराधिकारी मानकर चल रहे हैं।
खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से पहले और बाद में टिकट के लिए कपूर को अपना प्रतिद्वंद्वी मानकर चलने वाले कुछ नेता इन दिनों किशन कपूर के साथ चुंबक की तरह चिपके हुए हैं ताकि उपचुनाव में उत्तराधिकारी का सियासी लाभ मिल जाए।
धर्मशाला में पुत्र मोह
उधर, कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल के लोकसभा चुनाव लड़ने के चलते कांगड़ा में भी सेकेंड लाइन लीडरशिप की महत्वाकांक्षाएं हिलोरें मार रही हैं। जीएस बाली के पुत्र रघुवीर बाली, डा. राजेश शर्मा, सुरेंद्र काकू सहित अन्य नेता लोकसभा के साथ उपचुनाव की तैयारियों में भी जोरशोर से लग गए हैं।
विधानसभा चुनाव के दौरान काजल के विरोधी रहे कुछ नेता अब कांग्रेस प्रत्याशी को माथे पर जीत का टीका लगाकर दिल्ली भेजना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा भी उपचुनाव की उम्मीदें पाले हुए हैं।
वहीं, नूरपुर से विधायक राकेश पठानिया भी कपूर की जीत के अक्स में अपने लिए मंत्री की कुर्सी देख रहे हैं। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के एक युवा नेता के परिजनों ने तो अपने बेटे को विधायक बनाने के लिए लॉबिंग छेड़ रखी है।
होटल में परिजन रोज समर्थकों को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर करवा रहे हैं। कुछ नेताओं को यह भी चिंता सता रही है कि कपूर की जीत के बाद टिकट उनके बेटे को न मिल जाए।