शादी में वोट मांगे तो प्रत्याशी के खर्च में जुड़ेगा समारोह का आधा खर्च
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चुनावी मौसम में शादी, मुंडन या अन्य समारोहों की दावतों और धाम में प्रचार करना प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है। नामांकन के बाद अगर नेताओं ने यहां प्रचार किया तो समारोह की आधी राशि चुनावी खर्च में जुड़ जाएगी। शादियों के सीजन को देखते हुए चुनाव आयोग ने सख्ती बरतना शुरू कर दी है। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (उपायुक्तों) को निगरानी के निर्देश दिए हैं।
जिलों में गठित विभिन्न टीमें नेताओं की हर मूवमेंट पर नजर रखेंगी। इन दिनों पार्टियों के बड़े आयोजन भी आयोग के राडार पर हैं। चुनाव के दौरान प्रत्याशी ऐसे समारोहों में भीड़ को देखते हुए फायदा उठाने की ताक में रहते हैं।
इनमें धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर छोटे-बड़े घरेलू कार्यक्रम शामिल हैं। प्रत्याशी को बिना समर्थकों के ही ऐसे निजी कार्यक्रमों में शिरकत करने की अनुमति रहेगी। इसमें वोट मांगने या चुनावी बैठक करने की इजाजत नहीं होगी। मुख्य निर्वाचन कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेताओं की मूवमेंट पर विभिन्न टीमों की नजर रहेगी। साथ ही उनकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी
लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी रखेंगी नजर
वीडियो में अगर पाया गया कि कार्यक्रम का उपयोग जनता से जुड़ने, चुनावी अपील के लिए किया है तो प्रत्याशी की मुश्किल बढ़ना तय है। आम तौर पर नेता कार्यकर्ताओं के साथ ऐसे कार्यक्रमों के जरिये लोगों से जुड़ने की रणनीति बनाते हैं।
मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार बड़े कार्यक्रमों के अलावा जन्मदिन, मुंडन जैसे छोटे आयोजनों पर भी नजर रखने के लिए लेखपाल व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी। कोशिश यह है किसी भी ऐसे कार्यक्रम में प्रत्याशी मतदाता को किसी भी तरह के लालच या आश्वासन के जरिये प्रभावित न कर सके।