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राष्ट्रपति से लगाई गुहार, लापता सैनिकों की खोज को तत्काल शुरू करें सर्च ऑपरेशन

Mon, 23 Jul 2018 01:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनाली Updated Mon, 23 Jul 2018 01:01 PM IST
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letter to president for search operation in dhaka glacier

लाहौल-स्पीति जिले के ढाका ग्लेशियर से विमान के अवशेष और नर कंकाल मिलने के बाद हादसे के शिकार अन्य सैनिकों के अवशेष खोजने को ऑपरेशन की मांग तेज हो गई है। पर्वतारोही और एवरेस्ट फतेह कर चुके राजीव शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से गुहार लगाई है।  राजीव राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी व्यापक सर्च ऑपरेशन की मांग करेंगे। 

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नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण खेल संस्थान मनाली के निदेशक रह चुके राजीव शर्मा ने कहा कि अवशेष और कंकाल खोजकर सैनिकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह सीवी 13 और 14 चोटियों को कई बार फतेह कर चुके हैं।
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ये दोनो चोटियां इस रेंज में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर हैं। भौगोलिक हालात के जानकार होने के नाते उनका अनुमान है कि वर्ष 1968 हादसे के दौरान विमान चोटियों से टकराया होगा। इसके बाद विमान का मलबा बड़े क्षेत्र में फैल गया होगा। 50 साल बाद भी विमान में सवार सैनिकों में से अधिकांश के पार्थिव अवशेष नहीं मिल पाए हैं। वर्तमान में ग्लेशियर पिघल रहे हैं इसलिए वक्त गंवाए बिना तलाश शुरू की जानी चाहिए। 
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वहीं, एवरेस्ट विजेता और आईएमएफ  के सदस्य खिमी राम ने कहा, ढाका ग्लेशियर में सेना और सरकार की मदद से अवशेष खोजे जा सकते हैं। यदि जरूरत पड़ती है तो वह खुद अभियान का हिस्सा बनने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कई एजेंसियां उनसे संपर्क में हैं।

अब और देर नहीं की जानी चाहिए। अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण खेल संस्थान मनाली के सहायक निदेशक अश्वनी ने कहा कि फिलहाल उन्हें किसी ने संपर्क नहीं किया है। यदि खोज शुरू होती है तो वे अपने संस्थान समेत हर संभव प्रयासों को तैयार हैं।

उधर, जेएनयू दिल्ली में भूगर्भ शास्त्री एवं ग्लेशियर पर रिसर्च कर रहे मिलाप शर्मा ने कहा कि यह चोटियां चूंकि सबसे ऊंची हैं, लिहाजा हादसा विमान के चोटियों से टकराने से ही हुआ होगा।


संभव है कि चोटियों पर जमा हुआ ग्लेशियर भी टूटकर साथ ही गिरा होगा। इसी वजह से विमान का मलबा और उसमें सवार सैनिक नीचे दब गए होंगे। ग्लेशियर पिघलने से मलबा और कंकाल बाहर आना स्वाभाविक है। इस पर और खोज की जानी चाहिए।

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