ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में व्यापक स्तर पर अवैध पेड़ कटान, विजिलेंस ने ऐसे पकड़ा मामला
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वन्य जीव एवं जैविक विविधता के संरक्षण के लिए विकसित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के जंगल में ही वन संपदा सुरक्षित नहीं है। बीते दिन विजिलेंस ब्यूरो की कुल्लू टीम ने पार्क के बनाउगी में दबिश देकर अवैध रूप से काटी लकड़ी की बड़ी खेप पकड़ी है।
इसमें 83 स्लीपर, 108 कड़ियां, छह फ्रेम और छह तख्त बरामद किए हैं। वन माफिया ने देवदार के 15 से 20 पेड़ों का अवैध कटान किया है। एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और पूछताछ हो रही है।
यह पहला मौका नहीं है, जब इस तरह की दबिश कर वन संपदा बरामद की हो। इससे पहले भी अवैध कटान के कई मामले सामने आ चुके हैं। जड़ी-बूटियों का अवैध दोहन सरेआम हो रहा है।
शांघड, लपाह, बनाउगी आदि क्षेत्र में रातों रात दुर्लभ प्रजाति के बेशकीमती पेड़ गायब हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और कर्मचारियों की मनमानी से वन माफिया के हौसले बुलंद हैं।
हर साल करोड़ों की वन संपदा लूटी जा रही है। इससे पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। आखिर बड़ी संख्या में कट रहे पेड़ वन रक्षकों, आरओ, बीओ और डीएफओ की नजर में क्यों नहीं आ रहे हैं।
कार्रवाई पर हो गया था डीएफओ का तबादला
जबकि पार्क क्षेत्र को छोटे-छोटे भागों में बांटकर वन रक्षकों को तैनात किया गया है। शांघड में स्थिति सबसे अधिक अनियंत्रित है। यहां जंगल में देवदार के सैकड़ों ठूंठ अवैध कटान के गवाह बने हुए हैं। कुल्लू विजिलेंस के डीएसपी मदन धीमान ने बताया कि बनाउगी गांव के पास केलाबून में देवदार की लकड़ी की बड़ी खेप बरामद हुई है।
पार्क के अरण्यपाल अजीत ठाकुर ने कहा कि अवैध कटान मामले में कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मामले में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा। पांच माह पूर्व पार्क की तत्कालीन डीएफओ अभिलाषा सिंह ने शांघड क्षेत्र में दबिश कर भारी मात्रा में देवदार के स्लीपर बरामद किए थे। इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैली थी और वन माफिया पर शिकंजा कसा था। लेकिन बाद में डीएफओ का तबादला हो गया। तबादले कार्रवाई से जुड़ा होने की चर्चा भी रही।
यूनेस्को ने साल 2014 में घोषित की वर्ल्ड हेरिटेज साइट
यूनेस्को ने साल 2014 में इस पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया है। पार्क में पेड़-पौधों की लगभग 375 प्रजातियां हैं। दुर्लभ प्रजाति की जडी-बूटियों का यहां अथाह भंडार है। यही वजह है कि पार्क पर हमेशा माफिया की नजर रहती है लेकिन प्रबंधन की सुस्ती से यह अमूल्य खजाना लुट रहा है।