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आईजीएमसी ने खतरे में डाल दी मरीजों की जान

Sat, 05 Sep 2015 10:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 05 Sep 2015 10:47 AM IST
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lack of facilities in igmc shimla.

आपदा प्रबंधन पर सरकार जहां करोड़ों रुपये खर्च कर लोगों को जागरूक कर रही है वहीं इसके उलट आईजीएमसी अस्पताल में सारे कायदे कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुरक्षा के हिसाब से बनाए गए अस्पताल परिसर के भीतर अब अपने हिसाब से कमरे बनाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं तीमारदारों के बैठने की जगहों पर निर्माण हो रहा है। मरीज और तीमारदार बैठे तो कहां? इसकी जवाब किसी के पास नहीं। यही नहीं आपदा के दौरान अगर मरीजों और तीमारदारों को बाहर की तरफ भागना है तो भी दिक्कत होगी।

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अस्पताल के हर फ्लोर पर काम चल रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए न ही आपदा प्रबंधन और न ही नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत समझी। अस्पताल परिसर एक तरह से मुर्गे खाने में बदल रहा है। ऐसे में कोई आपदा हो जाए तो मरीजों और तीमारदार कैसे और कहां से बाहर निकलेंगे इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा। इसका जवाब प्रबंधन के पास भी नहीं है।
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शुक्रवार को हद तब हो गई जब प्रबंधन ने पर्ची काउंटर के एक हिस्से को भी तोड़ने के निर्देश दे डाले। यहां मौजूदा समय में छह काउंटर चल रहे हैं। इनकी जगह अब चार काउंटर ही रहेंगे। काउंटरों को एक तंग जगह पर शिफ्ट करने की बात चल रही है। अस्पताल प्रबंधन को अच्छी तरह से पता है कि मरीजों की भीड़ के आगे यह छह काउंटर भी कम पड़ते हैं ऐसे में इन्हें तोड़ने के बाद मरीजों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाएंगी।
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हर रोज औसतन आते हैं 5000 मरीज- आंकड़ों पर गौर करें तो सोमवार, मंगलवार और बुधवार को सबसे अधिक ओपीडी रहती है प्रत्येक दिन औसतन पांच हजार मरीज इलाज करवाने यहां पहुंचते हैं। इस स्थिति में अस्पताल प्रबंधन के यह फैसले मरीजों को सांसत में डालने वाले हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन दो काउंटरों को तोड़ने के पीछे तर्क दे रहा है कि यहां रेडियोलॉजी से एक टेस्ट मशीन स्थापित की जा रही है। अस्पताल के हर फ्लोर पर निर्माण कार्य के चलते अब मरीजों और तीमारदारों को बैठने तक की जगह नहीं बची है।

बैठने की जगह पर बना दिए डाक्टरों के कमरे-
हर फ्लोर पर डॉक्टरों के लिए कमरे बना दिए हैं। जबकि यह जगह मरीजों और तीमारदारों को बैठने के लिए थी। अब तीमारदार एक जगह खड़े हो जाते हैं। लेकिन यहां से भी उन्हें डाक्टर और सिक्योरिटी गार्ड भगा देते हैं। अब लोग जाएं तो कहां?

स्पेशल वार्ड में बना दिया ओटी-
स्पेशल वार्ड में एक दिन का किराया मरीज से एक हजार वसूल किया जाता है। इस फ्लोर में एक ही जगह पर वेटिंलेशन हैं लेकिन अब उसके सामने भी कमरा बनाने की तैयारी हो चुकी है। इतना ही नहीं यहां यूरोलॉजी महकमे का ऑपरेशन थियेटर बना दिया है।

बाल रोग विभाग के वार्ड में शौचालय नहीं-
बाल रोग वार्ड में बैठने के लिए बनाई जगह पर 20 बिस्तरों का वार्ड बनाया गया लेकिन इसके साथ शौचालय की व्यवस्था नहीं है। दुर्गंध फैलने से यहां रहना काफी मुश्किल है।

रैंप पर बना दिया कमरा-
अस्पताल प्रबंधन ने सीटीवीएस के बाहर रैंप पर कमरा बनाकर तैयार कर दिया है। आपदा के समय प्रबंधन का यह फैसला काफी घातक साबित हो सकता है। यहां से बाहर निकलने के लिए सभी को मुश्किलों का सामना करना होगा।


एक आध काउंटर ही टूटेगा-
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि एक आध पर्ची काउंटर टूटेगा, उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। वहां पर डिजिटल एक्सरे लगाया जा रहा है। यह भी मरीजों की सुविधा को ध्यान में रख किया जा रहा है।

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