{"_id":"64c266554a49d218aa03af76","slug":"kullu-news-gurus-and-disciples-jaag-on-the-burning-embers-in-the-wake-of-mata-nayana-devotees-throng-2023-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"देव आस्था: माता नयना की जाग में दहकते अंगारों पर चले गूर, दंग रह गए श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देव आस्था: माता नयना की जाग में दहकते अंगारों पर चले गूर, दंग रह गए श्रद्धालु
Thu, 27 Jul 2023 08:16 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 27 Jul 2023 08:16 PM IST
सार
प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर के पिपलागे में बुधवार रात को नयना माता की जाग (उत्सव) मनाई गई। माता नयना की जाग में दहकते अंगारों पर माता के गूर और चेलियां गुजरे।
विज्ञापन
माता नयना की जाग में दहकते अंगारों पर चले गूर।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर के पिपलागे में बुधवार रात को नयना माता की जाग (उत्सव) मनाई गई। माता नयना की जाग में दहकते अंगारों पर माता के गूर और चेलियां गुजरे। नजारे को देखकर जाग में आए श्रद्धालु दंग रह गए। बुधवार रात्रि जाग के चलते ढोल, नगाड़े और नरसिंगों की स्वरलहरियां गूंज उठीं। नयना माता की जाग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन
माता नयना माता के मंदिर में बुधवार दोपहर बाद से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। रात करीब 12 बजे तक यहां पर भजन-कीर्तन हुआ। स्थानीय लोगों ने माता की भेंटें गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद जाग का सिलसिला आरंभ हुआ। मंदिर परिसर में एक जगह आग जलाई गई थी, आधी रात तक यहां पर सिर्फ दहकते अंगारे ही बचे थे। शीतला माता मंदिर से बुधवार रात करीब 12 बजे के बाद माता नयना अपने मंदिर में आईं तो माता की जय जयकार हो उठी।
विज्ञापन
दहकते अंगारों पर माता के गूरों और चेलियां चलीं। श्रद्धालुओं ने माता नयना के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। त्रिनेत्रा मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे आदि की व्यवस्था की गई थी। माता के पुजारी अमित महंत ने कहा कि माता शीतला, माता कोयला कलैहली और नागराणी माता थलौट के निशान (चिह्न) भी जाग में शामिल हुए थे। जाग के दौरान दहकते अंगारों पर गूर और चेलियां चलते हैं, लेकिन दैवीय शक्ति से किसी को चोट तक नहीं पहुंचती है। यह परीक्षा की घड़ी होती है। माता नयना के गूर अश्वनी कुमार ने कहा कि माता की जाग में सभी देव परंपराओं का निर्वहन किया गया है।