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कुल्लू दशहरा: ढोल नगाड़ों की थाप पर निकली भगवान नरसिंह की तीसरी जलेब
Sat, 08 Oct 2022 08:48 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 08 Oct 2022 08:48 PM IST
सार
जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी चली। इसके पीछे देवता व देवलू नाचते-गाते चल पड़े।
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भगवान नरसिंह की जलेब।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव कुल्लू के चौथे दिन शनिवार को शाही अंदाज में भगवान नरसिंह की तीसरी जलेब निकली। ढोल नगाड़ों की थापा पर निकली जलेब में देवी-देवताओं के साथ देवलू भी झूमे। जलेब में सैंज घाटी के पांच देवी-देवताओं ने हिस्सा लिया। देवताओं ने जलेब की शोभा में चार चांद लगा दिए। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की ध्वनियों से पूरा ढालपुर मैदान गूंज उठा। जलेब के माध्यम से नरसिंह भगवान ने ढालपुर में रक्षा सूत्र बांधा। इस भव्य नजारे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।
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इससे पहले शाम 4:00 बजे राजा की चानणी के पास सैंज के देवता एकत्रित हुए। सारी तैयारी पूरी होने के बाद जलेब का सिलसिला शुरू हुआ। जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी चली। इसके पीछे देवता व देवलू नाचते-गाते चल पड़े। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार होकर सबसे बीच में चले।
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पालकी के दोनों ओर देवताओं के रथ सुशोभित होकर चले। राजा की चानणी से कुल्लू अस्पताल वाली सड़क से कॉलेज चौक से पुरानी एसबीआई पार्क होकर पूरे ढालपुर मैदान की एक परिक्रमा की गई। जलेब में रैला की माता आशापुरी, रैला के देवता लक्ष्मी नारायण, भूपन के रिंगू नाग, शैंशर के देवता मनु ऋषि और करथा नाग ने भी शोभा बढ़ाई।
गौर रहे कि दशहरा उत्सव में पांच दिन जलेब निकलती है। हर दिन अलग-अलग दिन जलेब निकलती है। दशहरा के पहले और आखिरी दिन ही जलेब नहीं निकलती है। दशहरा उत्सव में जलेब लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कई लोगों ने इस शानदार नजारे को अपने कैमरों में भी रिकॉर्ड किया। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि दशहरा उत्सव का जलेब एक अहम हिस्सा है।